एक दिन तिब्बत चीन पर राज करेगा : दलाई लामा
अगर भारत अपने मूल्य आधारित नैतिक शिक्षा पर अधिक जोर दे तो चीन भी उसके कदमों पर चलेगा।


नई दिल्ली : भले ही मौजूदा समय में राजनीतिक रूप से तिब्बत पर चीन का कब्जा है लेकिन एक दिन तिब्बत चीन पर राज करेगा। यह भविष्यवाणी है तिब्बत के धर्मगुरु दलाई लामा की। दलाई लामा ने हाल ही में कहा था कि चीन से तिब्बत की आजादी नहीं विकास की उम्मीद रखते हैं लेकिन हमारे सहयोगी अखबार 'टाइम्स ऑफ इंडिया' को दिए इंटरव्यू में उन्होंने चीन पर राज करने की भविष्यवाणी की है। इंटरव्यू में उन्होंने युद्ध और हथियारों को गैर-जरूरी बताते हुए करुणा और शिक्षा पर जोर दिया। उन्होंने कहा, 'अगर भारत अपने मूल्य आधारित नैतिक शिक्षा पर अधिक जोर दे तो चीन भी उसके कदमों पर चलेगा।' 

उन्होंने कहा कि युद्ध से समस्याओं के समाधान की उम्मीद अब बेमानी है और यह पुराना तरीका है। करुणा और शिक्षा के प्रसार से ही यह दुनिया एक बेहतर जगह बन सकती है। भारत और पाकिस्तान के हालातों की तुलना करते हुए उन्होंने कहा, 'शिक्षा आज के समय में महत्वपूर्ण है और भारत के लिए यह कोई नई बात नहीं है। भारत में अहिंसा का विचार 1000 साल से भी पुराना है।' 

भारत और पाकिस्तान के हालात की तुलना करते हुए उन्होंने कहा, 'मुझे ऐसा लगता है कि आधुनिक भारत बहुत शांतिपूर्ण है। पाकिस्तान की तुलना में भारत में हालात काफी अच्छे हैं। पाकिस्तान एक मुस्लिम देश है और भारत में पाकिस्तान की तुलना में अधिक मुस्लिम रहते हैं। दोनों ही मुल्कों के मुस्लिम एक ही कुरान पढ़ते हैं, लेकिन भारत में मुस्लिम ज्यादा शांतिप्रिय हैं। इसकी वजह है कि भारत में सदियों पुरानी अहिंसा की परंपरा आज भी जिंदा है।' 

भारतीय परंपराओं से प्रभावित होने की बात करते हुए दलाई लामा ने कहा कि युद्ध और हथियारों के इस्तेमाल से दुनिया में छोटी लड़ाई जीती जा सकती है। हथियारों के दम पर सत्ता तक जरूर पहुंचा जा सकता है, लेकिन लंबे रेस में यह काम नहीं आता है। उन्होंने कहा, 'भारत की प्राचीन शिक्षा प्रणाली से मुझे दृढ़ इच्छाशक्ति मिली। भारतीय संस्कृति में समाधि और मौन की प्रथाएं 3000 साल से भी पहले से हैं। भारतीय संस्कृति भावनाओं पर नियंत्रण और मानसिक स्तर पर लगातार सुधार की बात करती है।' 

दुनिया को अधिक बेहतर जगह बनाने और सरकारों के बीच हथियारों की लड़ाई खत्म करने के सवाल पर भी दलाई लामा ने भारतीय संस्कृति का हवाला दिया। उन्होंने कहा, 'बौद्ध धर्म अहिंसा का धर्म है और इसमें हिंसा, युद्ध के लिए कोई स्थान नहीं है। मेरा दृढ़ विश्वास है कि भारतीय परंपराओं और शिक्षा के विस्तार से विश्व भर में ज्यादा शांतिपूर्ण माहौल बनाया जा सकता है।' 


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