क्यों मुम्बई की सड़कों पर उमड़ा किसानों का जनसैलाब?
किसान बैंक से लिए गए कर्ज की पूरे तरीके से माफी और बिजली बिल में रियात की मांग कर रहे हैं.


मुम्बई: अखिल भारतीय किसान सभा के बैनर तले देश के 'अन्नदाताओं' का आंदोलन महाराष्ट्र में जोर पकड़ता जा रहा है. नासिक से किसानों का जनसैलाब मुम्बई पहुंच चुका है. ऐसे में चर्चा बना हुआ है कि अचानक से इतने किसान एक मंच पर कैसे साथ आए हैं. जानिए उन वजहों के बारे में जो महाराष्ट्र के 35 हजार किसानों को आंदोलन करने के लिए एक साथ लाने में सफल हुए.

स्वामिनाथन कमेटी की सिफारिशें लागू करना, कर्ज माफी सहित बिजली बिल की माफी किसानों की प्रमुख मांगे हैं. किसान बैंक से लिए गए कर्ज की पूरे तरीके से माफी और बिजली बिल में रियात की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि फसल बर्बाद होने के कारण बिजली बिल नहीं चुका पाते हैं. इसलिए उन्हें बिजली बिल में छूट दी जाए.

अखिल भारतीय किसान सभा के सचिव राजू देसले ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि हम राज्य सरकार से चाहते हैं कि हाइवे और रेलवे प्रोजेक्ट के नाम पर खेती की जमीन जबरन लेना बंद करे. उन्होंने कहा कि अपनी मांगें मनवाने के लिए विधानसभा का घेराव करेंगे. किसानों की मांगों में स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशें भी लागू करना है.

किसानों के इस आंदोलन को राजनीतिक रंग देने की लगातार कोशिश की जा रही है. सत्तारूढ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को छोड़कर सभी राजनीतिक दलों का समर्थन इस किसान आंदोलन को मिला है. शरद पवार की नेतृत्व वाली राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), शिवसेना, कांग्रेस और राज ठाकरे की नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने किसान आंदोलन को अपना समर्थन दिया है.

किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने के लिए प्रोफेसर एमएस स्वामीनाथन की अध्यक्षता में केंद्र सरकार ने नवंबर 2004 को 'नेशनल कमीशन ऑन फारमर्स' का गठन किया था, जिसे स्वामीनाथन आयोग के नाम से जाना जाता है. जानकारों का मानना है कि स्वमीनाथन कमेटी की रिपोर्ट को अगर लागू किया जाए तो सही मायने में देश के किसानों के लिए 'अच्छे दिन' आ जाएंगे. गौरतलब है कि कमेटी ने अभी तक सरकार को छह रिपोर्ट सौंपी है, लेकिन किसी भी मामले पर अमल नहीं हुआ है. 

क्या है स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट:

1 . किसानों की आमदनी को सुधारने के लिए रिपोर्ट में लागत से पचास प्रतिशत ज्यादा आमदनी करने के लिए अच्छी क्वालिटी के बीज और खाद मुहैया कराने की बात कही गई है.

2. हर फसल के लिए फसल बीमा और किसानों के लिए चार प्रतिशत की ब्याज पर आसानी से कर्ज की व्यवस्था हो.

3. रिपोर्ट में कर्ज वसूली में राहत, प्राकृतिक आपदा या संकट से जूझ रहे इलाकों में हालात सामान्य होने तक ब्याज में राहत जारी रहने की बात कही गई है.

4. खेती योग्य और जंगल की जमीनों को कॉरपोरेट के देने के लिए अधिग्रहण करने से रोका जाए.

5. स्वामीनाथन ने अपने रिपोर्ट में किसानों की मदद के लिए विलेज नॉलेज सेंटर बनाने की बात कही है, जहां किसानों को प्रशिक्षित किया जा सके.

6. महिला किसानों को ध्यान में रखते हुए उनके लिए किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए जाएं और बूढ़े किसानों के लिए पेंशन की व्यवस्था की बात भी कही है.

7. आपदा को ध्यान में रखते हुए हुए किसानों के लिए कृषि जोखिम फंड बनाया जाए, ताकि संकट आने पर किसानों को मदद मिल सके.

8. प्राकृतिक आपदाओं के समय किसान को मदद पहुंचाने के लिए एक एग्रिकल्चर रिस्क फंड का गठन किया जाए.

9. गरीबी रेखा से नीचे रह रहे लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा का इंतज़ाम करने की सिफारिश आयोग ने की.



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