...जब DMK चीफ करुणानिधि ने नकार दिया था भगवान राम का अस्तित्व!
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डीएमके (द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम) प्रमुख और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रहे 94 वर्षीय एम. करुणानिधि की तबीयत नाज़ुक है. तमिलनाडु के लोग उनके जल्दी स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं. द्रविड़ आंदोलन से जुड़े रहे करुणानिधि समाजवादी और सुधारवादी आदर्शों की बात करते रहे हैं. बता दें कि भगवान राम और रामसेतु के बारे में उन्होंने कभी एक ऐसा बयान दिया था, जिससे हिंदुओं में उनके खिलाफ जबरदस्त नाराजगी पैदा हो गई थी. ये अलग बात है कि एक समय डीएमके एनडीए का हिस्सा थी. करुणानिधि ने कहा था कि 'राम एक काल्पनिक चरित्र है.' इस पर जगह-जगह उनका विरोध हुआ.

तमिलनाडु में हिंसा की कुछ घटनाएं हुई, उनकी बेटी के घर पर तोड़फोड़ की गई. करुणानिधि के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को आहत करने की शिकायत तक दर्ज करवाई गई. भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने उनसे माफी मांगने की मांग की, लेकिन करुणानिधि ने किसी की कोई परवाह नहीं की. वे अपनी बात पर न सिर्फ कायम रहे हैं बल्कि हिंदूवादी संगठनों को ललकारते रहे.

वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई कहते हैं, "तमिलनाडु में सामाजिक सुधार आंदोलनों की एक परंपरा रही है. ईवी रामास्वामी पेरियार ने जाति और लिंग आधारित भेदभाव के खिलाफ आंदोलन चलाया था जिसे द्रविड़ आंदोलन के रूप में भी जाना जाता है. इसे करुणानिधि ने आगे बढ़ाया."

इसीलिए अपनी बेटी के घर पर तोड़फोड़ के बाद करुणानिधि ने कहा था, "क्या राम इंजीनियर थे जो उन्होंने पुल बनाया था. राम नाम के किसी व्यक्ति का अस्तित्व नहीं है." हिंदू संगठन रामसेतु को उसी पुल का अवशेष बता रहे थे जिसका जिक्र रामायण में है और जिसे राम की वानर सेना ने बनाया था. जबकि करुणानिधि भगवान राम को काल्पनिक चरित्र बताकर रामसेतु को खारिज कर रहे थे.

करुणानिधि धार्मिक पाखंड की खिलाफत करते हैं. इसलिए रामसेतु मसले पर आडवाणी को चुनौती दी थी कि वे चाहें तो वाल्मीकि रामायण पढ़कर किसी भी मंच पर इसे लेकर लेकर चर्चा कर लें. करुणानिधि ने यहां तक कह दिया था कि 'राम पियक्कड़ हैं. वाल्मीकि रामायण में कहा गया है कि राम तरह-तरह के नशीले पदार्थों का सेवन करते थे.'

करुणानिधि के बयान पर जब उस वक्त कानून मंत्री रहे हंसराज भारद्वाज ने कहा, 'हिमालय हिमालय है, गंगा गंगा है और राम राम हैं' तो करुणानिधि ने कहा, 'हिमालय और गंगा जितना बड़ा सत्य हैं, राम का चरित्र उतना ही झूठा है.'

वे यहीं नहीं रुके. उन्होंने कहा, 'नेहरू ने भी कहा था कि रामायण मात्र एक कहानी है और इसका उद्देश्य द्रविड़ों पर आर्यों की सुपरमेसी स्थापित करना था.'

मालूम हो कि द्रविड़ दर्शन के मुताबिक राम मर्यादा पुरुषोत्तम नहीं हैं, बल्कि वे उत्तर भारतीय संस्कृत बोलने वाले आर्य लोगों के प्रतीक हैं. रामायण और कुछ नहीं आर्यो की द्रविड़ों पर विजय का महिमामंडन है. इस थ्योरी को करुणानिधि ने अपनी राजनीति से सींचने का काम किया.

वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई के मुताबिक, "करुणानिधि पेरियार मूवमेंट से जुड़े रहे हैं. उन्होंने इस आंदोलन को अपनी फिल्मों और राजनीति दोनों माध्यम से आगे बढ़ाने का काम किया है. वे किसी की नाराजगी की परवाह नहीं करते थे. चाहे वो धर्म का मामला हो या फिर हिंदी भाषा का. उन्हें हिंदी विरोधी आंदोलन ने दक्षिण में लोकप्रिय बनाया. राजनीति में उन्होंने अपनी एक विशिष्ट जगह बनाए रखी है."


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