OPINION: राफेल से लेकर राम मंदिर तक हर चीज का जवाब है आरएसएस के पास!
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(भवदीप कांग)

आरएसएस प्रमुख मोहन राव भागवत गुरुवार को नागपुर में काफी आक्रामक दिखे. ये पिछले महीने विज्ञान भवन में उनके सहज और सरल स्वभाव से एकदम अलग था. अपने राजनीतिक भाषण में भागवत ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए अध्यादेश लाने की मांग की थी. इसके साथ ही 'सत्ता की राजनीति' और 'न्यायपालिका पर खराब विचार विमर्श' के लिए विपक्ष की निंदा भी की थी.

उन्होंने सीधे तौर पर लोकसभा चुनावों को टार्गेट करते हुए अनजाने में बीजेपी के चुनाव को लेकर ढीले रवैये को स्वीकार किया. इसके पीछे के मकसद में दो चीजे शामिल हैं. पहला राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा और दूसरा राम जन्मभूमि मुद्दे पर बहुसंख्यक भावनाओं को आघात पहुंचाना.

सरसंघचालक के वार्षिक विजयादशमी भाषण में पूरे देश के स्वयंसेवकों को संघ की विचारधारा के बारे में संदेश दिया गया. दिल्ली में वह बुद्धिजीवियों से बात कर रहे थे लेकिन नागपुर में वह कैडर को संबोधित कर रहे थे. इस साल के संदेश के अनुसार सरकार के खिलाफ अपनी शिकायत को अलग कर दें और फिर से बीजेपी के लिए चुनाव प्रचार में आत्मीयता के साथ जुट जाएं.

मतदाताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि भावना, जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र से ऊपर उठकर वोट करना होगा. ताकि चुनाव के बाद पछताना ना पड़े. यह ध्यान में रखना चाहिए कि राष्ट्रीय हित ही सर्वोच्च है.

भागवत एससी/एसटी एक्ट में सरकार के संशोधन से अगड़ी जातियों की नाराजगी को भली भांति जानते हैं. कुछ कट्टर बीजेपी समर्थकों ने इससे नाराज होकर घोषणा की है कि जब वे कांग्रेस को वोट नहीं दे सकते हैं, तो वे नोटा (उपर्युक्त में से कोई भी नहीं) चुनकर बीजेपी को दंडित करेंगे.

इसपर भागवत ने चेतावनी दी थी कि ऐसा रवैया अपनाने से फैसला कांग्रेस के पक्ष में जाएगा. अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए योजनाओं के द्वारा उन्होंने इसे संतुलित करने का प्रयास किया है.

विवादास्पद राफेल सौदे पर उन्होंने कहा था कि नई तकनीकि के साथ हमारे सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ाने का काम किया जा रहा है. जिससे विश्व स्तर पर देश की प्रतिष्ठा बढ़ें. साथ ही उन्होंने रक्षा उत्पादन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की मांग की है. इसके माध्यम से वह वोटरों को साधने की कोशिश कर रहे हैं.

इन सबके बीच आरएसएस 'राम मंदिर निर्माण' मुद्दे के साथ खड़ा है. इसे आक्रामकता के साथ दुबारा चुनावी मुद्दा बनाने की स्पष्ट रूप से कोशिश की जा रही है. मंदिर को आत्मसम्मान के लिए जरूरी बताते हुए उन्होंने नकारात्मक लोगों को समाज का धैर्य न जांचने की चेतावनी दी.

उन्होंने नक्सल नेटवर्क और राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंताओं संबंधी एक आश्चर्यजनक रूप से विस्तृत तस्वीर प्रस्तुत की, जो कि बीजेपी के 2019 चुनावी अभियान में सहायक होगी.

भागवत ने वर्ष 2009 में केएस सुदर्शन से पदभार संभाला था और उन्हें सबसे राजनीतिक सरसंघचालक माना जाता है. आरडीए और बीजेपी के बीच एनडीए-1 के दौरान तनाव दिख रहा था जोकि अब नहीं दिखता. कैडर की कुछ शिकायतें जरूर रही हैं लेकिन सरकार और आरएसएस शीर्ष के बीच अच्छा समन्वय रहा है. जिसके कारण पार्टी में संघ के 30 से ज्यादा पूर्णकालिक कार्यकर्ता मौजूद हैं.

किसानों और एफडीआई जैसे मुद्दों पर आरएसएस ने सहयोगी संगठनों को मोदी सरकार की समय समय पर आलोचना करने से नहीं रोका था. लेकिन इस साल की शुरूआत में अपने प्रतिनिधि सभा में भाषण के दौरान भागवत ने मौजूदा शासन को आरएसएस और देश के विकास के लिए अनुकूल बताया था. वहीं विजयादशमी भाषण के दौरान उन्होंने 2019 चुनावों के मद्देनजर राफेल से लेकर राम मंदिर तक सभी प्रमुख मुद्दों पर जवाब दिया है.


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