सबरीमाला में प्रवेश के बाद महिलाओं को मिल रही धमकियां, नहीं लौट रहीं घर
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केरल के सबरीमाला स्थित भगवान अयप्पा के मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के बाद राज्य में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है. सदियों पुरानी परंपरा तोड़ते हुए दो महिलाएं मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करने में कामयाब रही थीं. मंदिर में पारंपरिक प्रतिबंध को हटाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दो जनवरी को 42 वर्षीय कॉलेज लेक्चरर बिंदु और 39 वर्षीय कनकदुर्गा ने मंदिर में प्रवेश किया था.

दोनों महिलाओं को अब श्रद्धालुओं से लगातार धमकियां मिल रही हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर में 50 वर्ष से कम आयुवर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया था जिसके बाद सितंबर से ही सबरीमाला मंदिर विवादों के केंद्र में है. सितंबर से ही सबरीमाला मंदिर क्षेत्र में मंदिर परिसर के अधिकारियों और श्रद्धालुओं के बीच झड़प हो रही है. श्रद्धालुओं का हिंसक विरोध प्रदर्शन भी आए दिनों देखने को मिल रहा है.

40 वर्षीय बिंदु अम्मिनि और 39 वर्षीय कनकदुर्गा सदियों पुरानी परंपरा को पीछे छोड़ मंदिर में प्रवेश किया था. बिंदु केरल के कन्नूर विश्वविद्यालय में कानून की प्रवक्ता हैं वहीं कनकदुर्गा सिविल सर्विसेज में हैं. दोनों ने मीडिया से बताया बताया कि हिंसक धमकियों के बावजूद उन्होंने भगवान अयप्पा के दर्शन किए.

कनकदुर्गा ने बताया, 'हमें लोगों ने मंदिर में घुसने से रोका. वे हमें पीछे हटने के लिए रोक रहे थे. पुलिस अधिकारी और हमारे दोस्तों ने भी हमें ऐसा करने से रोका. क्योंकि उन्हें पता था कि हमें ऐसी प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ेगा.'

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 24 दिसंबर को मंदिर में प्रवेश करने का असफल प्रयास भी किया था. लेकिन उन्हें मंदिर जाने में कामयाबी 2 जनवरी को मिली. केरल के मुख्यमंत्री ने पुष्टि की थी कि 4 जनवरी को एक 46 वर्षीय महिला ने भी मंदिर में प्रवेश किया था.

कानून की लेक्चरर बिंदु बताती हैं, 'हमें मंदिर जाने में डर नहीं लगा क्योंकि हमारा मकसद मंदिर परिसर में जाना था.' केरल में दोनों महिलाओं के प्रवेश के बाद हिंसक विरोध प्रदर्शन भी हुए थे और एक दिन की राज्य में हड़ताल भी हुई थी. बिंदु ने कहा, 'बीजेपी सरकार को अपने कार्यकर्ताओं को संभाल कर रखना चाहिए.'

कोच्चि से बाहर किसी अनजान जगह से महिलाओं ने कहा कि उन्हें 2 जनवरी से ही प्रदर्शनकारियों की धमकियां मिल रही हैं. लेकिन उन्हें सुरक्षा अधिकारियों पर भरोसा है कि वे उन्हें अगले सप्ताह तक सुरक्षित घर पहुंचाएंगे.

बिंदु ने मीडिया से बताया, 'मैं हमेशा से कहती रही हूं कि मुझे पुलिस अधिकारियों और राज्य सरकार पर भरोसा है. हमें केरल के लोकतांत्रिक समाज पर भी भरोसा है.'


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