ट्रिपल तलाक पर मुस्लिम समाज का बढ़ा समर्थन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुए मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने इस मुद्दे पर बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाओं का समर्थन हासिल करने की बात कही है।


नई दिल्ली : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुए मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने इस मुद्दे पर बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाओं का समर्थन हासिल करने की बात कही है। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के अनुसार इस मुद्दे पर 10 लाख से भी ज्यादा मुस्लिमों, खासतौर पर मुस्लिम महिलाओं ने तीन तलाक के खिलाफ दायर की गई याचिका पर अपने हस्ताक्षर किए हैं। मुसलमानों ने तीन तलाक की प्रथा खत्म करने की अपील करते हुए इस याचिका को अपना समर्थन दिया है। 

कुरान के अनुसार पहले तलाक का ऐलान करने के बाद आदमी को तीन महीने तक अपने फैसले पर विचार करना होता है। इसके बाद भी अगर वह अपने फैसले पर कायम रहे तो दो बार और तलाक बोलकर ही तलाक माना जाएगा। कई इस्लामिक देशों में यह प्रथा प्रतिबंधित है लेकिन भारत में यह मान्य है। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने इस प्रथा के खिलाफ याचिका दायर कर रखी है। वहीं केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखते हुए सुप्रीमकोर्ट में कहा था कि यह प्रथा पुरुषों और महिलाओं के बीच कानूनी समानता के अधिकार के खिलाफ है। वहीं दूसरी तरफ ट्रिपल तलाक की प्रथा का बचाव करते हुए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा था कि महिला की हत्या कर देने से बेहतर है कि उसे पहले ही तलाक मिल जाए। पर्सनल लॉ बोर्ड के इस रुख के लिए उसकी काफी आलोचना भी हुई। 

उल्लेखनीय है कि तीन तलाक पर कानूनी लड़ाई लड़ रहीं आतिया साबरी ने हाल ही में कहा था कि उन्होंने भाजपा को वोट दिया था। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इसे अपने चुनावी घोषणापत्र में शामिल कर जहां तीन तलाक के मुद्दे को फ्रंटफुट पर रखा था। उत्तर प्रदेश चुनाव के समय भाजपा ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखने की भी चुनौती दी थी।


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