भारत को चीन के युद्धकारी रवैए से सावधान रहना चाहिएः तिब्बती नेता
भारत को चीन के युद्धकारी रवैए से सावधान रहना चाहिएः तिब्बती नेता


धर्मशाला। तिब्बत के निर्वासित प्रधानमंत्री लोबसांग सांगय ने गुरुवार को चीन की भ्रामक नीतियों के खिलाफ नई दिल्ली को चेताया और कहा कि जो तिब्बत के साथ हुआ वह भारत के साथ भी हो सकता है। सांगय ने संवाददाताओं से कहा, "डोकलाम गतिरोध और चीनी सैनिकों के भारतीय सीमा में घुसपैठ चीन की विस्तारवादी मानसिकता के संकेत हैं। भारत को चीन की युद्धकारी रवैया से सावधान होना चाहिए।

भारत के साथ सीमा पर चीन के हवाई क्षेत्रों और सड़कों के विकास के बारे में उन्होंने भारत को सतर्क रहने के लिए कहा। डोकलाम गतिरोध को समझने के लिए आपको चीन के 'दाहिने हाथ की हथेली और पांच ऊंगलियों' वाली रणनीति को समझना होगा। चीनी नेता माओ जेदोंग ने तिब्बत को दाहिने हाथ की हथेली के रूप में जबकि लद्दाख, सिक्किम, भूटान, नेपाल और अरुणाचल प्रदेश को पांच ऊंगलियों के रूप में वर्णित किया था।


सांगय ने आईएएनएस को बताया, "1959 में चीन को तिब्बत पर कब्जा करने से नहीं रोका गया और अब वह पांच ऊंगलियों की तरफ बढ़ रहे हैं। अगर तिब्बत पर चीन के कब्जे को रोका गया होता तो आज डोकलाम गतिरोध नहीं होता।" केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) के अध्यक्ष सांगय ने कहा कि भारत अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'नंबर एक देश' बनने की ओर अग्रसर है। बौद्ध धार्मिक पर्यटन क्षेत्र को विकसित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि भारत बुद्ध की भूमि है और दुनिया में 60-70 करोड़ बौद्ध हैं।  सांगय ने कहा, "केवल 0.1 प्रतिशत बौद्ध भी बौद्ध मठों की यात्रा करने के लिए भारत आते हैं और औसतन 1,000 डॉलर खर्च करते हैं तो प्रति वर्ष भारत 6 अरब डॉलर कमा सकता हैं।"

केंद्रीय तिब्बती प्रशासन हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में स्थित है जहां आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा भी रहते हैं।


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