ईरान ने न्यूक्लियर डील में किसी भी तरह की तब्दीली को किया खारिज
ट्रंप के इस भाषण के तुरंत बाद ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जावेद जरीफ ने कहा कि 2015 की डील पर फिर से वार्ता नहीं हो सकती।


तेहरान : ईरान के साथ न्यूक्लियर डील को अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा 'कूड़ा' कहे जाने और डील को जिंदा रखने के लिए नए सख्त प्रावधान लाने की मांग के बाद ईरान ने दो टूक कहा है कि न्यूक्लियर डील में किसी भी तरह का संशोधन उसे स्वीकार नहीं है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने शनिवार को कहा, 'ईरान इस समझौते में किसी भी तरह के बदलाव को न अभी स्वीकार करेगा और न ही भविष्य में। ईरान किसी भी दूसरे मुद्दे को न्यूक्लियर डील से जोड़ने की इजाजत नहीं देगा।' बता दें कि जुलाई 2015 में ईरान का अमेरिका समेत दुनिया की 6 बड़ी ताकतों के साथ परमाणु समझौता हुआ था, जिसे जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ ऐक्शन (JCPOA) नाम से जाना जाता है।

इससे पहले शुक्रवार को डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान पर परमाणु प्रतिबंधों की छूट को एक बार फिर बरकरार रखा लेकिन उन्होंने यूरोपियन पार्टनर्स से मांग की कि वे अमेरिका के साथ मिलकर 'डील की भयंकर गड़बड़ियों को दूर करें, नहीं तो अमेरिका खुद को इससे बाहर कर लेगा।' ट्रंप ने कहा कि नई डील ऐसी होनी चाहिए कि ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर रोक लगे और उसके न्यूक्लियर प्लांट्स पर स्थायी तौर पर प्रतिबंध लग सके। 

ट्रंप के इस भाषण के तुरंत बाद ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जावेद जरीफ ने कहा कि 2015 की डील पर फिर से वार्ता नहीं हो सकती। जरीफ ने ट्वीट किया, 'JCPOA पर फिर से वार्ता नहीं हो सकती। अमेरिका को लगातार भड़काऊ बयान देने के बजाय डील का पूरी तरह सम्मान करना चाहिए, जैसे ईरान कर रहा है।' 

जरीफ के ट्वीट के बाद उनके मंत्रालय की तरफ से भी बयान जारी किया गया। बयान में यूएस ट्रेजरी द्वारा शुक्रवार को 14 व्यक्तियों पर मानवाधिकारों से जुड़े मसलों और ईरान के मिसाइल प्रोग्राम को लेकर नये प्रतिबंध लगाए जाने की आलोचना की गई। खासकर ईरान की न्यायपालिका के प्रमुख अयातुल्लाह सादेह लरिजानी का नाम प्रतिबंधित व्यक्तियों की सूची में रखे जाने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की गई। बयान में ईरान ने कहा कि जुडिशरी चीफ का नाम प्रतिबंधों की सूची में रखकर अमेरिका ने मर्यादा की सभी सीमाओं को लांघ दिया है। अमेरिका की सरकार को इस तरह के शत्रुतापूर्ण कदम के नतीजों की जिम्मेदारी लेनी होगी। 

इरान का कहना है कि अमेरिका ने ईरान की गैर-परमाणु गतिविधियों जैसे मानवाधिकार और मिसाइल परीक्षणों पर प्रतिबंध जारी रखा है और इस तरह न्यूक्लियर डील से ईरान को जिस वित्तीय फायदे की उम्मीद थी, वह नहीं हो रहा है। 

बता दें कि ट्रंप ने तीसरी बार ईरान के साथ हुई न्यूक्लियर डील पर सख्त टिप्पणी की है। बराक ओबामा के कार्यकाल में हुई इस डील को ट्रंप 'अब तक की सबसे बुरी डील' तक कह चुके हैं। अब उन्होंने अपने यूरोपीय सहयोगियों से कहा है कि वे ईरान के साथ नए डील पर 120 दिनों में अगर राजी नहीं होते हैं तो अमेरिका खुद को इस डील से अलग कर लेगा। 


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