क्यों BJP और BSP-SP के लिए नाक की लड़ाई है यूपी की 10वीं राज्यसभा सीट
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लखनऊ, राज्यसभा की 59 (केरल के एक उपचुनाव सहित) सीटों के लिए होने जा रहे मतदान पर पूरे देश की नजरें लगी हैं. खासतौर से यूपी की 10वीं राज्यसभा सीट के मुकाबला काफी रोचक हो चुका है.

यूपी में बीजेपी के 8 और एसपी के एक कैंडिडेट की जीत पक्की है लेकिन 10वीं सीट पर बीजेपी के उम्मीदवार खड़ा कर देने से पेंच फंस गया है. एसपी और कांग्रेस 10वीं सीट के लिए मिलकर बीएसपी प्रत्याशी भीम राव अंबेडकर को जिताने की कोशिश में हैं.

गौर करने वाली बात ये है कि एक उम्मीदवार को जीत के लिए 37 वोटों की जरूरत है. वोटों के गणित के मुताबिक बीएसपी के पास इस वक्त कुल 19 वोट हैं जबकि एसपी के पास कुल 47 वोट हैं जिसमें उसका एक प्रत्याशी चुने जाने के बाद उसके पास सिर्फ 10 वोट ही बचेंगे. कांग्रेस के पास कुल 7 वोट हैं वहीं आरएलडी का एक वोट है जिसे मिलाकर बीएसपी ये सीट जीत सकती थी लेकिन ऐन वक्त पर नरेश अग्रवाल के पाला बदल लेने से गणित गड़बड़ हो गया है.

नरेश अग्रवाल के बेटे नितिन अग्रवाल के क्रोस वोटिंग की आशंका है वहीं निषाद पार्टी के एकमात्र विधायक ने बीजेपी प्रत्याशी को समर्थन का ऐलान किया है. उधर, बृहस्पतिवार रात पुरवा से बीएसपी विधायक अनिल सिंह बीजेपी की बैठक में शामिल हुए, इससे विपक्ष का मामला और खराब होता नजर आ रहा है.

इस सीट पर बीएसपी की जीत एसपी के लिए भी उतनी ही महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्यसभा चुनाव में समर्थन की एवज में बीएसपी ने एसपी को फूलपुर और गोरखपुर में समर्थन दिया था.

हालांकि अखिलेश ने अंतिम समय में राजा भैय्या का समर्थन हासिल कर बीएसपी की जीत को पक्का करने की भरपूर कोशिश जरूर की है. राजा भैय्या अखिलेश की डिनर पार्टी में भी पहुंचे थे. राजाभैया ने एसपी के प्रत्याशी को राज्यसभा सीट के लिए समर्थन देने का भरोसा दिया है. इस तरह से एसपी एक वोट और जुटाने में कामयाब हो जाएगी. यहां गौर करने वाली बात ये है कि राजाभैया ने सीधे बीएसपी के प्रत्याशी को समर्थन का ऐलान नहीं किया है. इसकी वजह उनका मायावती से पुराना विवाद बताया जाता है. बीएसपी ने हाई कोर्ट से मुख्तार अंसारी (बीएसपी) और हरिओम यादव (एसपी) को वोटिंग के लिए जेल से रिहा करने की मांग भी की है. लेकिन दोनों की वोटिंग पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है. इससे बसपा की मुश्किलें और बढ़ गई हैं.


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