सीरिया ने दोबारा रसायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया तो नतीजे भुगतने होंगे : निक्की हेली
अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने सीरिया में रासायनिक हथियारों के ठिकानों को निशाना बनाकर हमले किए हैं.


संयुक्त राष्ट्र : संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की राजदूत निक्की हेली ने रविवार (15 अप्रैल) को कहा कि अगर सीरिया फिर से रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल करता है तो अमेरिका प्रतिक्रिया के लिए पूरी तरह तैयार है. अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने सीरिया में रासायनिक हथियारों के ठिकानों को निशाना बनाकर हमले किए हैं. यह कार्रवाई पिछले सप्ताह डौमा शहर में संदिग्ध रासायनिक हमले की प्रतिक्रिया में की गई है. हेली ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लक्ष्मण रेखा खींच दी है और अमेरिका सीरिया पर दबाव बनाए रखेगा. उन्होंने कहा, ‘‘कल (शनिवार, 14 अप्रैल) की सैन्य कार्रवाई से हमारा संदेश पूरी तरह स्पष्ट है. अमेरिका असद शासन को रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल नहीं करने देगा.’’ हेली ने आरोप लगाया कि सुरक्षा परिषद और रूस रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल करने वालों को जवाबदेह ठहराने के अपने कर्तव्य का निर्वहन करने में विफल रहे हैं.

पाकिस्तान ने सीरिया पर जताई चिंता
उधर, पाकिस्तान ने सीरिया के हालात को लेकर ‘गंभीर चिंता’ जताई और सभी पक्षों से आग्रह किया कि वे संयुक्त राष्ट्र चार्टर का सम्मान करें तथा सीरिया संकट को हल करें. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर सीरिया में रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल की निंदा की. उल्लेखनीय है कि अमेरिका ने ब्रिटेन और फ्रांस के साथ संयुक्त कार्रवाई कर सीरिया पर मिसाइल हमला किया है. सीरिया के पूर्वी गोता के डौमा में हाल में कथित रूप से सीरिया द्वारा रसायनिक हथियारों के इस्तेमाल को लेकर अमेरिका ने पहले ही असद सरकार को चेतावनी दी थी. इस हमले में बच्चों सहित 75 लोग मारे गए थे.

सीरिया पर अमेरिकी हमले की निंदा के रूसी प्रस्ताव को संरा ने किया खारिज
वहीं दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने रूस के उस प्रस्ताव को भारी बहुमत से खारिज कर दिया है जिसमें उसने अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस द्वारा सीरिया पर किये गए ‘हमले’ की निंदा की बात कही थी. इसके साथ ही सीरिया के रासायनिक हथियारों के ठिकानों को लक्षित कर किये जा रहे गठबंधन के हवाई हमलों को सुरक्षा परिषद का मत भी मिल गया है. रूस की तरफ से बुलाई गई इस आपात बैठक में हालांकि इस बात को लेकर निराशा भी व्यक्त की गई कि अंतरराष्ट्रीय संगठन की यह सबसे ताकतवर इकाई पिछले सात सालों से चले आ रहे सीरियाई संघर्ष से निपटने में नाकाम नजर आई है.

तीन पश्चिमी देशों के गठबंधन की सेनाओं द्वारा सीरिया में ‘हमले’ और ‘आगे किसी तरह के बल के इस्तेमाल’ की निंदा और इसे फौरन रोके जाने की मांग वाले प्रस्ताव को 15 सदस्य देशों वाली सुरक्षा परिषद के सिर्फ दो देशों चीन और बोलीविया का साथ मिला. इसके विपरीत आठ देशों ने रूसी प्रस्ताव के खिलाफ मत दिया. इनमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, नीदरलैंड्स, स्वीडन, कुवैत, पोलैंड और आइवरी कोस्ट शामिल हैं. मतदान के दौरान चार देश - इथियोपिया, कजाखिस्तान, इक्वेटोरियल गिनी और पेरू - अनुपस्थित रहे.


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