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जब आप सब कुछ कर सकते हैं, तो एक ही चीज पर क्यों अटके रहे - सलिल  सैंड
१९९३ से ही भारतीय टीवी उद्योग में सलिल अपना योगदान देते आ रहे हैं.


भारतीय फिल्म आलोचक, मनोरंजन रिपोर्टर, लेखक और प्रेरक वक्ता सलिल सैंड कहते हैं कि जब आप सब कुछ कर सकते हैं, तो एक चीज़ के साथ क्यों अटके रहे।

सलील सैंड एक स्वतंत्र पटकथा लेखक है, जिन्हने ज़ी टीवी, स्टार प्लस, यूटीवी, बालाजी टेलीफ़िल्म्स और दूरदर्शन सहित कई चैनलों के लिए काम किया हैं! वह स्कूल और कॉलेज के दिन से ही प्रतिभाशाली व्यक्ति रहे हैं, सलिल एक स्वर्ण पदक विजेता और 'मुंबई विश्वविद्यालय' से जेनेटिक्स में स्नातकोत्तर रहे हैं।

 सलिल एक मनोरंजन पत्रकार के साथ साथ एक फिल्म समीक्षक, प्रेरक वक्ता और लेखक भी हैं, इससे एक बात तो जाहिर हैं, ऐसा कुछ भी नहीं है जो सलिल नहीं कर सकते है।

जब सलिल से पूछा गया कि वह सब कुछ एक साथ कैसे कर लेते हैं, तो उन्होंने कहा, "मेरा सफ़र बहुत ही मजेदार रहा हैं, और आप एक चीज के साथ क्यों अटके रहना चाहते हैं, जब आप सब कुछ कर सकते हैं? मैं हर चीज को ट्राई करना चाहता हूँ, और इन सभी चीजों ने मुझे बहुत अनुभव दिया हैं, जिससे मुझे खुद को संवारने में काफी मदद मिली। लेकिन मुझे लिखने का अधिक शौक हैं, और मेरा ज्यादातार काम लेखन में ही है।"

१९९३  से ही भारतीय टीवी उद्योग में सलिल अपना योगदान देते आ रहे हैं, प्रोग्राम जैसे तारा, हम पांच, सा रे गा मा पा, शपथ, सी आई डी और आहट, जैसे कई प्रमुख कार्यक्रमों का हिस्सा रह चुके हैं। सलिल अपनी लेखनकला का कौशल बहुत सारे सीरियलस में दिखा चुके हैं, जैसे क्या हादसा क्या हकीकत, क्योंकि सास भी कभी बहु थी, कस्तूरि, कहीं तो होगा, कसौटी जिंदगी की, मात पिता के चरणों में स्वर्ग, जस्सी जैसे कोई नहीं, कुछ कहती हैं ये खामोशिया, और बहुत सारे.

सलिल फिल्मफेयर अवार्डस, स्क्रीन अवार्ड्स, स्टारडस्ट अवार्ड्स, इंडियन टेली अवार्ड्स, मिस वर्ल्ड 2000 और मिलेनियम लाइव जैसी इवेंट्स की रचनात्मक टीम का भी एक हिस्सा रह चुके हैं ।

इन दिनों सलिल एंड टी वी के लिए “सिद्धि विनायक” लिख रहे हैं, और सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविज़न के लिए “ये प्यार नहीं तो क्या है” पर काम कर रहे हैं, और माझा डिजिटल अवार्ड्स, जो मराठी फिल्म उद्योग के लिए डिजिटल मंच पर पहला पुरस्कार है, बनाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।


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