​​ एयर इंडिया की 100 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में सरकार
​​ एयर इंडिया की 100 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में सरकार
एयर इंडिया को 33000 करोड़ के कर्ज के साथ बेचने का ऑफर दिया गया था।


नई दिल्ली : सरकार एक बार फिर घाटे में चल रही एयर इंडिया को बेचने का विचार कर रही है। इसके 76 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का एक प्रयास विफल हो चुका है। पिछली बार सरकार को कोई खरीदार नहीं मिला था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रशासन एक बार फिर निजीकरण की प्रक्रिया पर विचार कर रहा है। 

आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा कि अल्पसंख्यक राज्य की हिस्सेदारी वाले क्लॉज को शामिल करते हुए इसपर पुनः विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सराकार कई विकल्पों को लेकर चल रही है और 24 फीसदी हिस्सेदारी अपने पास रखने की इच्छा नहीं रखती है। 

उन्होंने कहा, 'जिस नीति को अपनाकर एयर इंडिया की हिस्सेदारी खरीदने का ऑफर दिया गया था, उसने काम नहीं किया। इसलिए अब कुछ अलग तरह से किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य यह नहीं है कि 24 फीसदी हिस्सेदारी खुद रखे। इसपर भी पुनर्विचार किया जा सकता है।' 

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी का हाई प्रोफाइल प्राइवेटाइजेशन प्लान 31 मई को खत्म हो गया। 50,000 करोड़ से ज्यादा के कर्ज में डूबी एयर इंडिया को कोई खरीदार नहीं मिला। इंडिगो ने पहले इसे खरीदने की इच्छा जताई थी लेकिन जब सरकार ने स्पष्ट किया कि वह एयर इंडिया इंटरनैशनल ऑपरेशन्स को अलग से नहीं बेच रही है तो एयरलाइन ने हाथ पीछे खींच लिए। 

एयर इंडिया को 33000 करोड़ के कर्ज के साथ बेचने का ऑफर दिया गया था। एयरलाइन इस समय सरकार द्वारा दिए जाने वाले बेलआउट पैकेज पर काम चला रही है। इससे पहले सरकार का यह प्रयास विपक्ष के विरोध की वजह से सफल नहीं हो पाया था।


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