तुषार कपूर की स्वतंत्रता दिवस की बचपन की यादें
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नई दिल्लीः 15 अगस्त का दिन यानी आजादी का दिन हर कोई अपनी अपनी आजादी अपने ढंग से मनाता है. इस दिन वह जो करना चाहे वह करने के लिए आजाद है. बॉलीवुड एक्टर तुषार कपूर भी कुछ ऐसा ही मानते हैं, वह कहते हैं स्वतंत्रता दिवस यानी छुट्टी का दिन, छुट्टी हर उस चीज से जो वह नहीं करना चाहते और आजादी हर उस चीज की जो वह करना चाहते हैं. तुषार ने कहा," स्वतंत्रता दिवस तो रोज मना सकते हैं लेकिन छुट्टी रोज नहीं मिलती. इंडिपेंडेंस डे पर छुट्टी मना लेते हैं. इंडिपेंडेंस डे पर दोस्तों के साथ बाहर जाता हूं, मूवी देखता हूं, फैमिली के साथ वक्त बिताता हूं.  लेकिन इस साल में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर एक इवेंट के लिए यूएस जा रहा हूं." 

वह आगे कहते हैं, "हर कोई इंडिपेंडेंस डे एंजॉय करना चाहता है, फ्लैग होस्टिंग के बाद हर कोई पार्टी करना चाहता है. हम आजाद हैं वह सब करने के लिए जो हम करना चाहते हैं."

तुषार ने देश में आजादी के बाद से जो बदलाव आए हैं और जो बदलाव आने चाहिए उसके बारे में भी बात की, वह कहते हैं देश को तो आजादी मिल गई है 1947 में, लेकिन बहुत सारे भारतीय बतौर व्यक्ति आज भी आजाद नहीं है.    उनके पास राइट नहीं है, फ्रीडम ऑफ चॉइस नहीं है, अपने विचार नहीं रख सकते, जो करना चाहते हैं वह नहीं कर सकते, उनके पास बेसिक  फंडामेंटल राइट्स नहीं है, जो हमारे कॉन्स्टिट्यूशन में दिए गए हैं.  जहां तक आजादी की बात है यह सब चीजें ज्यादा मायने रखती हैं." 

तुषार आगे कहते हैं, " लेकिन वक्त के साथ चीजें बदल रही है सोसाइटी में बदलाव आता है, ग्लोबलाइजेशन हो रहा है तो धीरे-धीरे हम और फ्री होते जा रहे हैं." तुषार बचपन में किन चीजों से आजादी ढूंढते थे, आज स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उन्होंने बताया, " बचपन में फ्राइडे का इंतजार करते थे, स्कूल से आजादी चाहिए होती थी. फ्राइडे इवनिंग का बेसब्री से इंतजार करते थे, कब शाम होगी, घर जाएंगे, बिल्डिंग में खेलेंगे और फिर संडे शाम को हमारी फ्रीडम वापस चली जाती थी.

देश भक्ति के गाने हो या भारत का तिरंगा, स्वतंत्रता दिवस की कई यादें हैं. तुषार की भी आजादी की सालगिरह की कुछ ऐसी ही यादें है. भले ही मनोज कुमार के देशभक्ति के गाने हो या नन्ना मुन्ना राही, वह आज भी इन्हें याद करते हैं और तिरंगा देखते हैं तो फिर अपने बचपन में खो जाते हैं. तुषार कहते हैं, " फ्लैग को देखकर बचपन की याद आती है, प्राउड फील करते हैं. बचपन में फ्लैग बनाते थे, गार्डन में घर में क्लास में लगाते थे, प्रोजेक्ट बनाते थे. फ्लैग पकड़कर मार्च करते थे  यह मेरी सबसे यादगार मेमोरी है."  


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