जन्मदिन विशेष: प्रियंका गांधी- अनाधिकारिक तौर पर बेहद सक्रिय राजनेता
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में वैसे तो कांग्रेस चौथे नंबर की पार्टी मानी जाती है. लेकिन सूबे में इसकी दो अहम सीटें रायबरेली और अमेठी से हमेशा केंद्र की राजनीति पर अपना असर डालती रही है. इन सीटों पर वैसे तो सोनिया गांधी और राहुल गांधी जीत दर्ज करते रहे हैं. लेकिन गांधी परिवार का एक और नाम यहां अपनी धमक रखता है. ये नाम है प्रियंका गांधी.

वैसे तो प्रियंका गांधी चुनावी राजनीति में कभी आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आईं, लेकिन कांग्रेस पार्टी में उन्हें अनाधिकारिक तौर पर बेहद सक्रिय राजनेता माना जाता है.

कांग्रेस में प्रियंका गांधी को पसंद करने वालों की कमी नहीं है. कई बार ​अलग—अलग जिलों की कांग्रेस कमेटी की तरफ से उन्हें अपने क्षेत्र से मैदान में उतरने की मांग भी उठती रही है. अब लोकसभा चुनाव से पहले रायबरेली सीट पर चर्चाएं गर्म हुई हैं. कहा जा रहा है कि चूंकि सोनिया गांधी सक्रिय राजनीति से दूर हो गई हैं, लिहाजा प्रियंका रायबरेली से मैदान में उतर सकती हैं. हालांकि कांग्रेस हाईकमान हमेशा की तरह इस मुद्दे पर चुप है.

वैसे राजनीतिक सक्रियता की बात करें तो प्रियंका ने खुद को अमेठी और रायबरेली तक ही सीमित कर रखा है. लेकिन पर्दे के पीछे वह एक कुशल रणनीतिकार के तौर पर भी जानी जाती हैं. इसकी बानगी पिछले यूपी विधानसभा चुनाव में देखने को मिली. माना जाता है कि 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन में प्रियंका गांधी की भूमिका अहम थी.

यूपी विधानसभा चुनाव में प्रियंका गांधी कांग्रेस की स्टार प्रचारक सूची में भी शामिल थीं. लेकिन उन्होंने रायबरेली और अमेठी में ही चंद सभाओं में हिस्सा लिया. इस दौरान चुनावी रैली में नहीं दिखने पर कांग्रेस के यूपी प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने कहा था कि वह चुनाव मैनेजमेंट देख रही हैं. एक तरफ राहुल गांधी और अन्य नेता जनता से सीधा संवाद कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रियंका गांधी आर्मी चीफ की तरह चुनाव मैनेजमेंट देख रही हैं.

प्रियंका गांधी अमेठी और रायबरेली में दशकों से राहुल और सोनिया का चुनावी प्रबंधन संभालती रही हैं. चाहे वह रायबरेली, अमेठी में जनसभा हो, कार्यकर्ताओं के साथ बैठक हो या सांसद प्रतिनिधि के तौर पर जनता से सीधा संवाद हो. वह 2007 से लगातार यहां सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं.

कयास तो अब ये भी हैं कि सोनिया गांधी के खराब स्वास्थ्य को देखते हुए 2019 में प्रियंका का नाम रायबरेली से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में सामने आ सकता है. हालांकि प्रियंका हमेशा ही सक्रिय राजनीति में आने की बात से इंकार करती रही हैं.

सोनिया गांधी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से दूर होने के दौरान रायबरेली की जनता ने साफ किया था कि यहां से नेहरू गांधी परिवार का ही नेतृत्व उन्हें मंजूर होगा. दरअसल कहा जाने लगा है कि शायद 2019 में सोनिया गांधी चुनाव न लड़ें.


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