विश्व कप में भारत को पाकिस्तान के साथ नहीं खेलने का पूरा हक: शोएब अख्तर
तूफानी गेंदबाज रहे शोएब अख्तर ने पुलवामा हमले में शहीद हुए 40 से ज्यादा सीआरपीएफ जवानों के लिए दुख जाहिर किया.


हैदराबाद: पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के क्रिकेटर भी आमने-सामने आ गए हैं. भारत के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली, हरभजन सिंह समेत कई क्रिकेटर कह चुके हैं कि इस हमले के विरोध में भारत को पाकिस्तान से सभी रिश्ते तोड़ लेने चाहिए. इनमें खेल भी शामिल है और भारत को विश्व कप में पाकिस्तान से मैच नहीं खेलना चाहिए. पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर शोएब अख्तर को भारतीय क्रिकेटरों की प्रतिक्रिया रास नहीं आई. उन्होंने कहा कि भारत को इस बात का पूरा हक है कि वह विश्व कप में पाकिस्तान से खेले या ना खेले. हालांकि, इस बात पर राजनीति नहीं होनी चाहिए. 

क्रिकेट को राजनीति से जोड़ना गलत 
अपने जमाने के तूफानी गेंदबाज रहे शोएब अख्तर ने पुलवामा हमले में शहीद हुए 40 से ज्यादा सीआरपीएफ जवानों के लिए दुख जाहिर किया. उन्होंने एक निजी चैनल से बातचीत में कहा, ‘भारत उस देश के साथ खेलने से मना कर सकता है जिस देश ने उनके साथ बुरा किया है. लेकिन पूर्व भारतीय क्रिकेटर जिस तरह से क्रिकेट को राजनीति से जोड़ रहे हैं, वह गलत है.’ 

हम अपने प्रधानमंत्री का समर्थन करते हैं
शोएब अख्तर ने कहा, ‘क्या खेल में राजनीति होनी चाहिए? बिलकुल भी नहीं. हमें इस बात का बहुत दुख है कि भारत के जवानों को इतने बुरे हालातों से गुजरना पड़ा. लेकिन अगर मैं अपने देश की बात करूं तो हम एक हैं, हमारे अंदर एकता का भाव है और हम अपने प्रधानमंत्री के बयान का समर्थन करते हैं.’

इसमें कोई शक नहीं कि उनके देश पर हमला हुआ है 
रावलपिंडी एक्सप्रेस के नाम से लोकप्रिय अख्तर ने आगे कहा, ‘भारत को पूरा अधिकार है कि वो पाकिस्तान के साथ विश्व कप में मैच न खेले. उनके देश पर घातक हमला हुआ है. हम इस बात पर बहस नहीं कर सकते.’ कई पूर्व भारतीय क्रिकेटर और खेल प्रशंसक पाकिस्तान से खेल से जुड़े सभी रिश्ते तोड़ने की बात कर रहे हैं. 

पाक को वर्ल्ड कप से बाहर करने की मांग माने जाने की संभावना कम
इस बीच, सुनील गावस्कर ने कहा कि अगर बीसीसीआई पाकिस्तान को वर्ल्ड कप से बाहर करने की मांग करता है तो इस मांग को ठुकराए जाने की संभावना अधिक है. गावस्कर ने कहा, ‘भारतीय बोर्ड ऐसा प्रयास कर सकता है, लेकिन ऐसा नहीं होगा. क्योंकि अन्य सदस्य देशों को इसे स्वीकार करना होगा और मुझे नहीं लगता कि बाकी देश भी भारत की बात मानेंगे. मुझे भरोसा नहीं हूं कि आईसीसी का सम्मेलन इसके लिए सही मंच है.’


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