पश्चिम उप्र में पहले चरण की आठ सीटों पर कांटे की टक्कर, चुनाव प्रचार तेज
सत्रहवीं लोकसभा के लिए हो रहे चुनाव में उत्तर प्रदेश की आठ सीटों पर 11 अप्रैल को पहले चरण का मतदान है।


लखनऊ, (हि.स.)। सत्रहवीं लोकसभा के लिए हो रहे चुनाव में उत्तर प्रदेश की आठ सीटों पर 11 अप्रैल को पहले चरण का मतदान है। पश्चिम उत्तर प्रदेश की इन आठ सीटों पर कांटे की टक्कर बतायी जा रही है। हालांकि, मतदाताओं को लुभाने के लिए सभी सियासी दलों ने अपने चुनाव प्रचार को तेज कर दिया है।

सभी सीटों को फतह करना भाजपा के लिए चुनौती
प्रथम चरण की सभी आठों सीटों सहारनपुर, कैराना, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर पर पिछले चुनाव में भाजपा ने कब्जा किया था। कैराना के सांसद हुकुम सिंह की मौत के बाद हुए पिछले साल हुए उपचुनाव में यह सीट रालोद के खाते में चली गई थी। ऐसे में पश्चिम उत्तर प्रदेश की इन सभी सीटों को फतह करना इस समय भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। सपा, बसपा और रालोद का गठबंधन इन सीटों पर भाजपा के लिए बड़ी मुश्किल बनकर खड़ा है। दूसरी तरफ कभी सपा के कद्दावर नेता रहे शिवपाल सिंह यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी गठबंधन की हवा निकालने में लगी हुई है। इस बार कांग्रेस भी उत्तर प्रदेश के चुनाव प्रचार में प्रियंका गांधी को उतारकर चुनाव को अपने पक्ष में करने की वह भरपूर कोशिश कर रही है। 

कांग्रेस ने बिजनौर सीट से नसीमुद्दीन सिद्दीकी को उतारकर यहां के चुनाव को रोचक बना दिया है। नसीमुद्दीन सिद्दीकी कभी बसपा सुप्रीमो मायावती के बेहद खास और बसपा के कद्दावर नेता थे। ऐसे में वह गठबंधन के वोट बैंक में सेंध लगाकर बसपा उम्मीदवार को बड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं। सपा-बसपा-रालोद गठबंधन ने मलूक नागर को यहां से मैदान में उतारा है। भाजपा से निवर्तमान सांसद कुंवर भारतेंद्र सिंह एक बार फिर भाग्य आजमा रहे हैं। शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी ने यहां से गुर्जर नेता ईलम सिंह पर दांव लगाया है।

इसी तरह मेरठ सीट से भी कांग्रेस ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबू बनारसी दास के बेटे हरेंद्र अग्रवाल को टिकट देकर वहां के चुनाव को गठबंधन के लिए चुनौतीपूर्ण कर दिया है। गठबंधन की तरफ से यह सीट बसपा के खाते में है और मायावती ने प्रदेश के पूर्व मंत्री हाजी याकूब कुरैशी को उतारा है। भाजपा के निवर्तमान सांसद राजेंद्र अग्रवाल यहां से लगातार तीसरी बार जीतने की आस लगाए हुए हैं। उधर, उपचुनाव में कैराना सीट भाजपा से रालोद की तबस्सुम हसन ने छीनी थी, इस बार वह फिर गठबंधन की उम्मीदवार हैं। उनके सामने भाजपा उम्मीदवार प्रदीप चौधरी बड़ी चुनौती बने हुए हैं। इस सीट से कांग्रेस ने पूर्व राज्यसभा सांसद हरेंद्र मलिक को मैदान में उतारा है। 

दो केन्द्रीय मंत्रियों समेत कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर
पहले चरण के मतदान में कई और दिग्गजों की भी प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। रालोद प्रमुख अजित सिंह मुजफ्फरनगर सीट पर सपा-बसपा-रालोद गठबंधन के उम्मीदवार हैं, तो उनके बेटे जयंत बागपत सीट से भाग्य आजमा रहे हैं। जयंत को निवर्तमान भाजपा सांसद सत्यपाल सिंह और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के चौधरी मोहकम कड़ा टक्कर दे रहे हैं। केंद्र सरकार के मंत्री और पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह अपनी पुरानी सीट गाजियाबाद से फिर भाजपा उम्मीदवार के रुप में चुनाव लड़ रहे हैं। उनका मुकाबला गठबंधन के सुरेश बंसल और कांग्रेस उम्मीदवार डॉली शर्मा से है। 

दूसरे केंद्रीय मंत्री डा. महेश शर्मा एक बार फिर गौतमबुद्धनगर (नोएडा) सीट से भाजपा की तरफ से मैदान में हैं। प्रारम्भ में यहां भाजपा का पलड़ा भारी दिख रहा था लेकिन कांग्रेस ने जैसे ही इस सीट से अरविंद सिंह चौहान को उम्मीदवार बनाया तो भाजपा की बेचैनी बढ़ गयी। दरअसल, गौतमबुद्धनगर संसदीय क्षेत्र जातीय समीकरण में ठाकुर बहुल बताई जाती है और कांग्रेस उम्मीदवार अरविंद सिंह चौहान ठाकुर बिरादरी से आते हैं। ऐसे में माना जा रहा कि यदि वह ठाकुर वोट अपने पक्ष में करने में सफल रहे तो यहां की लड़ाई त्रिकोणात्मक हो सकती है क्योंकि गठबंधन से बसपा के उम्मीदवार सत्यवीर जातीय गणित में दूसरे नंबर पर आने वाली गुर्जर बिरादरी से आते हैं। शिवपाल ने यहां प्रगतिशील समाजवादी पार्टी से जितेंद्र सिंह को टिकट देकर जातीय समीकरण को और पेचीदा बना दिया है। 
उधर, सहारनपुर में भाजपा ने मौजूदा सांसद राघव लखन पाल पर ही विश्वास जताया है। उनका मुख्य मुकाबला कांग्रेस के इमरान मसूद से है। कांग्रेस सहारनपुर सीट को अपनी मानती है। यह सीट मुस्लिम बहुल्य मानी जाती है। गठबंधन की तरफ से यह बसपा के खाते में है और मायावती ने यहां से हाजी फजर्लुर रहमान को टिकट दिया है। वहीं शिवपाल ने अपने दल से मो0 उवैस को मैदान में उतारकर यहां की लड़ाई को बहुकोणीय बनाने की कोशिश की है।

कुल 96 उम्मीदवार मैदान में 
लोकसभा चुनाव के प्रथम चरण में उत्तर प्रदेश के इन आठ संसदीय सीटों के लिए कुल 96 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। नाम वापसी के बाद सहारनपुर में कुल 11 उम्मीदवार, कैराना में 13, मुजफ्फरनगर में 10, बिजनौर में 13, मेरठ में 11, बागपत में 13, गाजियाबाद में 12 तथा गौतमबुद्ध नगर में कुल 13 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। पहले चरण के लिए कुल 146 उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किया था, जिसमें से जांच के दौरान 49 पर्चे खारिज हो गये थे और एक उम्मीदवार ने नाम वापस ले लिया था। 

मतदाताओं की कुल संख्या 1.50 करोड़ 
प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एल. वेंकटेश्वर लू के अनुसार प्रथम चरण के आठों संसदीय क्षेत्रों में मतदाताओं की कुल संख्या 1.50 करोड़ है, जिनमें 82.24 लाख पुरुष, 68.39 लाख महिला और 1014 तृतीय लिंग के मतदाता हैं। इन निर्वाचन क्षेत्रों में कुल 6716 मतदान केंद्र तथा 16581 मतदेय स्थल स्थापित किए गए हैं। मतदान 11 अप्रैल को प्रातः सात बजे से अपराह्न छह बजे तक होगा। मतगणना 23 मई को होगी।


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