जरूरत से ज्यादा आजाद महबूबा मुफ्ती
जरूरत से ज्यादा आजाद‘‘ महबूबा मुफ्ती


प्रेम शर्मा 
निश्चित तौर पर कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। इसी के चलते भारत सरकार हर स्तर पर भारत की इच्छा के विपरीत दोहरे कानून और भारत से इतर संविधान होने के बावजूद कश्मीर की  आर्थिक से लेकर हर स्तर पर मदद करता है। कश्मीर को लेकर जिस तरह से अलगाववादी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी पार्टी की प्रधान महबूबा मुफ्ती के बयान आते है वह देश द्रोह की श्रेणी के है। इसे राजनैतिक मजबूरी कहे या फिर विडम्बना कि इस तरह के देश विरोधी बयानों की श्रंखला रूक नही रही है। दो दिन पहले महबूबा मुफ्ती के इस बयान ने तो सारी हदें पार कर दी कि ‘‘ न समझोगे तो मिट जाओगे ऐ हिन्दोस्तान वालों,तुम्हारी दास्तान तक न होगी दास्तानों में। वाकई यह बयान बहुत गंम्भीर था और इसका जबाब भाजपा के गंम्भीर ने गम्भीरता से दिया। यह प्रश्न यह उठता है कि भारत के न्याय व्यवस्था इस तरह के बयानों को नजरअंदाज कर रही है या फिर उसके अधिकार क्षेत्र के बाहर का मामला है। बहरहाल मु्फती के इस बयान ने यह लिखनें को मजबूर कर दिया है कि महबूबा मुफती को जरूरत से ज्यादा आजादी मिल चुकी है, जिसे अब वापस लेना ही देश हित और राष्ट्र हित में होगा। 
आपकों याद हो कि पुलवामा हमले के बाद  भारत द्वारा पाकिस्तान पर की गई जवाबी कार्रवाई पर पूरा देश झूम रहा है, नाच गा रहा है और चाहे पक्ष का हो चाहे कोई विपक्ष का नेता सभी समर्थन करते दिखाई दे रहे हैं।लेकिन इसके विपरीत अपने जाने-माने अंदाज में विपक्षियों के पैरोकार पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती ने पाकिस्तान से युद्ध की पैरवी करने वालों को असली जाहिल करार दिया था। उस दौरान वह बोली थी कि चाहे मुझे देश विरोधी कहें, लेकिन मैं वायुसेना की स्ट्राइक समर्थन नहीं करती। उस दौरान महबूबा ने ट्वीट कर कहा था कि वायुसेना की स्ट्राइक पर लोगों में युद्धोन्माद है। ज्यादातर लोग अंजान हैं, लेकिन पढ़े लिखे लोगों का युद्ध को लेकर उत्साह दिखाना ही असली जहालत है। उन्होंने साथ ही लिखा कि मैं शांति की पैरवी करती हूं, जानें कुर्बान करने के बजाए उन्हें बचाया जाना चाहिये। वह बोली कि मैं ऐसे लोगों से सहमत नहीं हूं, जो युद्ध की मांग कर देशभक्ति का सुबूत देने के लिए कह रहे हैं। अब हिन्दोस्तानियों का नामों निशान मिटाने वाला बयान तो सीधे सीधे भारत की अस्मिता पर हमला है। हालकि हाल ही में भाजपा में शामिल हुए पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर की कश्मीर मुद्दे को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के साथ ट्विटर पर तीखी बहस हो गई। क्रिकेट की पिच पर आक्रामक खेल दिखाने वाले गंभीर ने महबूबा को उसी अंदाज में जवाब दिया। इससे तिलमिलाई महबूबा ने गंभीर को ट्विटर पर ब्लॉक कर दिया, जिसके बाद इस बहस का अंत हुआ। हाल ही में पीडीपी नेता ने अनुच्छेद 370 को हटाने जाने को लेकर कहा था कि अगर ऐसा होता है तो इसका मतलब है कि भारत का संविधान जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं होगा और अगर भारतीय इसे नहीं समझते हैं तो वे ‘गायब’ हो जाएंगे और उनकी कहानी का अंत हो जाएगा। इस पर जवाब देते हुए गंभीर ने ट्वीट किया, ‘यह भारत है, आपकी तरह कोई दाग नहीं, जो गायब हो जाएगा।’पूर्व क्रिकेटर के इस बयान पर महबूबा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘उम्मीद है कि भाजपा में आपकी राजनीतिक पारी आपके क्रिकेटर करियर की तरह बेहद छोटी नहीं रहेगी।’गंभीर ने जवाब दिया, ‘ओह, आपने मेरे ट्विटर हैंडल को अनब्लॉक कर दिया। मेरे ट्वीट का जवाब देने में आपको 10 घंटे लगे। बहुत धीमा। यह आपके व्यक्तित्व में गहराई की कमी को दर्शाता है। कोई आश्चर्य नहीं कि आप इन मुद्दों को सुलझाने के लिए संघर्ष कर रही हैं।’ महबूबा ने गंभीर को जवाब देते हुए कहा कि मैं आपके मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हूं। आपको ब्लॉक कर रही हूं ताकि आप दो रुपये प्रति ट्वीट के हिसाब से कहीं और जाकर ट्रोलिंग कर सकें। यानि यह सवाल जबाब इतना बताने के लिए काफी है कि महबूबा मु्फ्ती भारत नही पाकिस्तान के प्रति अपनी जबाबदेही तय करती है। इससे पहले भी  जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी की नेता महबूबा मुफ्ती ने दो परमाणु शक्तियों भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध होने की किसी भी संभावना से इंकार करते हुए कहा चुकी है कि ‘‘ अगर जंग हुई तो भारत को पाकिस्तान से ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता है। दो एटमी ताकतों के बीच जंग कभी नहीं होने वाली है। खुदा ना करे, अगर जंग हुई तो हम में से कोई नहीं बचेगा। हमारा नुकसान ज्यादा होगा। हमारे पास खोने के लिए बहुत ज्यादा है। पाकिस्तान के पास खोने को ज्यादा कुछ नहीं है। एक टीवी शो के दौरान एंकर के सवालों के जो भी जबाब महबूबा मु्फती ने दिये वह इस बाॅत के घोतक है कि महबूबा मुफ्ती को भारत की वर्तमान एवं पूर्व सरकारों ने राजनैतिक फायदे के लिए जरूतर से ज्यादा आजादी दे रखी है। शो में दिये जबाब की बानगी देखियें  हमने टनल में होने वाली चेकिंग बंद करवाई थी, जम्मू-कश्मीर में बेवजह होने वाली चेकिंग पर रोक लगवाई थी। आतंकियों पर पाकिस्तान का कंट्रोल नहीं, पाकिस्तान में खुद आतंकी हमले हो रहे हैं।पाकिस्तान को टमाटर न देने से क्या समस्या हल हो जाएगी।  मैं पाकिस्तान क्यों जाऊं? आपको जम्मू और कश्मीर कश्मीरियों के बगैर चाहिए? इसीलिए आप बोलते हो कश्मीरी पाकिस्तान चले जाएं? यहां हमारी जमीन है, घर है। हम क्यों जाएं पाकिस्तान? पाकिस्तान वे लोग जाएं जो जंग के नाम पर दूसरों को बेवकूफ बना रहे हैं।चीन, अमेरिका, रूस पाकिस्तान के साथ, पाकिस्तान को अलग-थलग कहना गलत है। हमने पाकिस्तान से बातचीत के लिए बीजेपी से हाथ मिलाया था। लोगों को याद होगा कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए ने व्यापार की आड़ में देश में आतंक को हो रही फंडिंग रोकने के लिए दोनों देशों की सीमा पर व्यापार को बंद करने की सिफारिश का विरोध करते हुए कश्मीर की तत्कालीनमुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने  कहा था कि  कैद कश्मीरियों की आजादी के लिये पाक अधिकृत कश्मीर के सभी रास्ते खोले जाए। उन्होंने चेतावनी भरे लब्जों में यह भी कहा था कि चवा के लिए रास्ते बंद नहीं किये जा सकते, क्योंकि यदि ऐसा हुआ तो कश्मीर के लिये हालात और भी खतरनाक बन जाएंगे। महबूबा ने आर्टिकल 35ए को खत्म किए जाने के प्रयास की खबरों के बीच केन्द्र को यह भी चेतावनी दे चुकी है कि ‘‘ आग से मत खेलें, 35ए का बाजा न बजाएं। अगर ऐसा हुआ तो व देखेंगो जो 1947 से अब तक नहीं हुआ है। अगर इस पर हमला किया जाता है तो मैं नहीं जानती कि जम्मू कश्मीर के लोग तिरंगे की जगह कौन सा झंडा पकड़ने को मजबूर हो जाएंगे।वास्तविकता यह है कि आतंकवादियों के लिए महबूबा का रुख नरम रहता है ।  भारतीय सेना ने शहीद औरंगजेब को कत्ल करनेवाले आतंकियों के अड्डे का पता लगा लिया था। उन्हें आतंकियों के बारे में सटीक जानकारी मिली थी लेकिन इस काउंटर ऑपरेशन को लॉन्च करने के लिए महबूबा मुफ्ती ने आर्मी को इजाजत नहीं दी थी। इसी तरह महबूबा मुफ्ती ने पत्रकार शुजात बुखारी के हत्यारों के खिलाफ भी ऑपरेशन की इजाजत नहीं दी थी। उस दौरान महबूबा ने कहा था कि अगर एनकाउंटर होता है तो हालात काबू करने मुश्किल होंगे। बाद महबूबा मुफ्ती ने श्रीनगर में दहशतगर्दों को पकड़ने के लिए सर्च और डिस्ट्रॉय ऑपरेशन की इजाजत भी नहीं दी। महबूबा मुफ्ती अमरनाथ यात्रा के लिए एक्स्ट्रा सिक्योरिटी फोर्सेस के डिप्लॉयमेंट के फेवर में नहीं थी और वो भी ऐसे हालात में जब सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेसियों के पास अमरनाथ यात्रा को टारगेट किए जाने के स्ट्रॉन्ग इनपुट मौजूद थे। पूरे रूट पर आर्मी के जवानों के साथ सीआरपीएफ के 20 और बटालियन को तैनात किया जाना था..लेकिन महबूबा ने इसके लिए क्लीयरेंस नहीं दी...इससे बात और बिगड़ गई थी। यही नही महबूबा मुफ्ती सरकार की तरफ से आतंकवादियों के खिलाफ आर्मी से इन्फॉर्मेशन शेयर होना भी बंद हो चुकी थी। आतंकियों के हाइडआउट्स को लेकर किसी तरह की जानकारी साझा नहीं की जा रही थी। इन सब बातों का नतीजा ये हुआ कि बीजेपी ने पीडीपी सरकार से जून 2018 में खुद को अलग कर दिया। ऐसे में देश की जनता की इस मांग को नकारा नही जा सकता कि पाकपरस्त अलगाववादी नेताओं और आतंकवादियों के हिमायती नेताओं फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला जैसे कश्मीरी नेताओं को दी गई सीआरपीएफ की सुरक्षा हटाई जाए और उन्हें सुरक्षा के लिहाज से अपने रहमों-करम पर छोड़ दिया जाना चाहिए।


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