प्रियंका गांधी ने कहा पुरानी पेंशन बहाली पर पूरक घोषणापत्र जारी करेगी कांग्रेस
काँग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को दिया ज्ञापन


बिजली इन्जीनियरों ने काँग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को दिया ज्ञापन 
लखनऊ। बिजली इंजीनियरों की  राष्ट्रीय फेडरेशन ने कांग्रेस महासचिव श्रीमती प्रियंका गांधी को ज्ञापन देकर मांग  की कि बिजली सेक्टर में चल रही  निजीकरण की ऊर्जा नीति को वापस लिया जाए और देश के व्यापक हित में बिजली निगमों का एकीकरण कर विद्युत् परिषद् निगम लि गठित किये जाएँ जिसमे उत्पादन , पारेषण और वितरण पूर्व की तरह एक साथ हों । फेडरेशन ने यह भी मांग की कि ऊर्जा क्षेत्र में ठेकेदारी प्रथा पूरी तरह समाप्त कर संविदा कर्मियों को नियमित किया जाये तथा सभी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन प्रणाली बहाल की जाए । प्रियंका गांधी ने ऑल इण्डिया पावर इन्जीनियर्स फेडरेशन को आश्वासन दिया कि उनकी पार्टी बिजली सेक्टर में सार्वजानिक क्षेत्र की किसी भी संपत्ति को निजी घरानों को देने का विरोध करेगी और बिजली सेक्टर में सार्वजनिक क्षेत्र के महत्त्व को देखते हुए इसे सुदृढ़ किया जाएगा । स्ट्रेस्सड असेट के नाम से निजी घरानों द्वारा बिजली वितरण कंपनियों और बैंको को ब्लैक मेल करने की फेडरेशन की शिकायत पर प्रियंका गांधी ने बताया कि कांग्रेस निजी घरानों के घोटालों की जांच करायेगी  और स्ट्रेस्सड असेट पर सम्यक निर्णय लेने की नीति तय करेगी । सभी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन बहाली पर प्रियंका गांधी ने कहा कि कांग्रेस पुरानी पेंशन बहाली की पक्षधर है और इस बाबत कांग्रेस शीघ्र ही पूरक घोषणापत्र जारी कर पुरानी पेंशन बहाली की नीति स्पष्ट करेगी ं ऊर्जा क्षेत्र में नियमित भर्ती और संविदा कर्मियों के नियमतीकरण पर भी उन्होंने पार्टी की नीति स्पष्ट करने का आश्वासन दिया। 

ऑल इण्डिया पावर इन्जीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे के नेतृत्व में कल रात रायबरेली में बिजली इंजीनियरों के प्रतिनिधिमंडल ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी से मिल कर पॉवर सेक्टर और कर्मचारियों की समस्याओं पर अपना पक्ष रखा ं । प्रतिनिधिमंडल में उप्रराविप अभियंता संघ के महासचिव राजीव सिंह , अजय द्विवेदी ,पी के पांडेय, रवि यादव तथा  सरकारी विभाग के अधिकारी व् शिक्षक संगठन के  प्रमुख पदाधिकारी एच एन पांडेय ,रीना त्रिपाठी ,बी एस गांधी और अनिल सिंह सम्मिलित थे ं।
फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि प्रियंका गांधी को दिए गए ज्ञापन  मे कहा गया है कि विगत वर्षों में बिजली और कोयला क्षेत्र के निजीकरण के प्रयासों के दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं। बिजली के क्षेत्र में निजी घरानों को मनमानी छूट देने का नतीजा यह है कि लगभग 02 . 40 लाख करोड़ रु के बिजली संयंत्र ठप्प पड़े हैं और स्ट्रेस्ड असेट हो गए हैं जिसका खामियाजा इन्हे कर्ज देने वाले सरकारी क्षेत्र के बैंकों को भी उठाना पड़  रहा है। गलत ऊर्जा नीति के चलते बिजली कम्पनियों पर 10लाख करोड़ रु से अधिक का घाटा और कर्ज हो गया है।भ्रश्टाचार के चलते निजी घरानों द्वारा कोयला आयात और  बिजली प्लाण्ट के आयात  के नाम पर 50हजार करोड़ रु से अधिक का घोटाला सामने आया है जिस पर खुफिया रिपोर्ट आ चुकी है जिसे दबाया जा रहा है। बिजली फेडरेशन ने मांग की है कि कांग्रेस  यह वायदा करें कि वे एक उच्च स्तरीय समिति गठित कर ( जिसमे बिजली कर्मचारी व् उपभोक्ता भी हों ) इलेक्ट्रिसिटी ऐक्ट 2003 की समीक्षा करेंगे , खासकर जल्दबाजी में बिजली बोर्डों का विघटन कर कई कार्पोरेशन बनाये जाने के दुष्परिणामों और निजीकरण हेतु किये जाने वाले और संशोधनों विशेषतया इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2014 ध्2018 को पूरी तरह समाप्त करने पर विचार करेंगे। उच्च स्तरीय समिति का मुख्य उद्देश्य बिजली निगमों का एकीकरण कर बिजली बोर्ड निगम का पुनर्गठन करना होगा जिसमे बिजली उत्पादन , पारेषण और वितरण एक साथ हों। फेडरेशन ने ज्ञापन में कहा  है कि ठेकेदारी प्रथा समाप्त कर सभी संविदा कर्मचारियों को नियमित करने और पुरानी पेंशन बहाली का वायदा भी कांग्रेस पूरक  घोषणा पत्र में करे जिससे समय रहते देश के 25 लाख बिजली कर्मी और उनके परिवार यह निर्णय ले सकें कि वे आगामी लोकसभा चुनाव में उन्हें वोट दें या न दें। 


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