पांच माह से वेतन से वंचित निगम कर्मी
उप्र अल्पसंख्यक वित्तीय एवं विकास निगम


लखनऊ। आज महासंघ की आपात बैठक सतीश कुमार पाण्डे की अध्यक्षता में आहूत की गयी, जो कि उप्र अल्पसंख्यक वित्तीय एवं विकास निगम के कर्मचरियों की अत्यन्त आवश्यक एवं संवेदनशील समस्याओं को लेकर बुलाई गयी। कर्मचारियों द्वारा सामूहिक रूप से जवाहर भवन के प्रांगण में आत्मदाह किये जाने की नोटिस दी गयी है। कर्मचारियों की मुख्य समस्याएंे निम्नवत् हैं,चतुर्थ वेतनमान का वेतन मिल रहा है। ईपीएफ वित्तीय कठिनाईयों के कारण जमा नहीं हुआ है जो कि बकाया रू.,1.50 करोड़ से अधिक हो गया है।,4-5 महीने तक वेतन नहीं मिल रहा है। उक्त कारणों से कर्मचारियों की शिक्षा-दीक्षा पूर्ण रूप से प्रभावित है। निगम कर्मचारी आर्थिक बोझ के कारण भुखमरी के कगार पर आ पहॅंुचे हैं। कर्मचारियों को किसी प्रकार की चिकित्सा प्रतिपूर्ति नहीं हो पा रही है। सेवानिवृत्ति कर्मचारियों को किसी प्रकार का वित्तीय सेवा लाभ नहीं मिल पा रहा है। निगम में वर्तमान में 84 कर्मचारी चतुर्थ वेतनमान में कार्यरत् हैं। निगम को वर्तमान में प्रदेष सरकार अथवा भारत सरकार के स्तर से किसी भी प्रकार की कोई वित्तीय सहायता उपलब्ध नहीं करायी जा रही है और न ही किसी योजना का संचालन हो रहा है। निगम कर्मियों के वेतन का भुगतान भी खराब वित्तीय स्थिति के दृष्टिगत समय से सम्भव नहीं हो पा रहा है। समय-समय पर निगम के कर्मी अपनी सेवा पूर्ण करते हुये सेवा से सेवानिवृत्ति हो रहे है जिनको किसी भी प्रकार का सेवानिवृत्ति पर दिया जाने वाला आर्थिक लाभ भी दिया जाना सम्भव नहीं हो पा रहा है। धनाभाव के कारण कर्मचारियों के काटे गये भविष्य निधि की धनराशि भी जमा नहीं हो पा रही है। प्रषासनिक संचालन के व्यय का भार उठाया जा पाना भी सम्भव नहीं हो पा रहा है। विभिन्न मद् भविष्य निधि, वेतन भत्ते इत्यादि, सेवानिवृत्ति कार्मिकों के देयों का भुगतान, प्रशासनिक व्यय इत्यादि मद् में लगभग रू0 18.00 करोड़ की धनराशि देयकों के रूप में बकाया हो चुकी है। चूॅंकि निगम एक कल्याणकारी संस्था है, जिसका उद्देश्य लाभ अर्जित करना नहीं है। शासन से अनुदान के रूप में धनराशि की माॅग निगम द्वारा पूर्व में की जाती रही है, जिसके सम्बन्ध में शासन स्तर पर पुनर्विनियोग के माध्यम से धनराशि निगम को उपलब्ध कराये जाने के सम्बन्ध में कार्यवाही की पत्रावली शासन में प्रचलित है, किन्तु निगम को अभी तक किसी भी प्रकार की वित्तीय सहायता एवं अनुदान उपलब्ध नहीं कराया गया है। कर्मचारीगणों द्वारा प्रस्तुत माॅग पत्र में यह भी इंगित किया गया है कि यदि उक्त समस्याओं जैसे वेतन भत्ते, ईपीएफ तथा समायोजन इत्यादि की कार्यवाही 15 दिनों के अन्दर नहीं की जाती है तो कर्मचारीगण विवष होकर आत्मदाह की कार्यवाही जवाहर भवन के प्रांगण में  करेंगे, जिसकी जिम्मेदारी प्रबन्धन,शासन एवं प्रशासन की होगी। उपरोक्त के पक्ष में जवाहर भवन इन्दिरा भवन कर्मचारी महासंघ, उप्र राज्य कर्मचारी महासंघ,राज्य निगम कर्मचारी महासंघ,उ0प्र0 4-5 वर्षो से संघर्षरत् रहते हुये शासन प्रशासन के साथ मुख्य मंत्री, मंत्री, अल्पसंख्यक कल्याण, मुख्य सचिस, अपर मुख्य सचिव आदि के साथ अनेकों बार बैठकें,वार्ता हो चुकी है, जिसमें कर्मचारियों का समायोजन प्रषासनिक विभाग के अन्तर्गत विभाग ( अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय,सर्वे वक्फ, अरबी फारसी मदरसा बोर्ड, वक्फ विकास निगम) में समायोजन कराया जाना, अल्पसंख्यक वित्तीय एवं विकास निगम तथा वक्फ विकास निगम मिलाकर, निर्माण निगम बनाकर समायोजन तथा पाॅचवां,छठा,सातवां वेतनमान दिये जाने अथवा प्रशासनिक मद में कुछ बजट आदि की व्यवस्था कराये जाने इत्यादि पर बार-बार आश्वासन दिया गया परन्तु आज तक कोई ठोस निर्णय कर्मचारियों के समस्याओं के समाधान हेतु नहीं लिया गया। महासंघ द्वारा यह स्पष्ट किया गया था कि यदि कर्मचारियों के वेतन,भत्ते, ई0पी0एफ0, सेवानिवृत्ति कर्मियों को वित्तीय लाभ एवं कर्मचारियों का समायोजन इत्यादि की कार्यवाही 15 दिन के अन्दर नहीं की जाती है तो महासंघ अल्पसंख्यक वित्तीय एवं विकास निगम के कर्मचारियों के आन्दोलनात्मक निर्णय मतें पूर्ण रूप से भागीदारी करेगा। चूॅंकि 15 दिन का समय व्यतीत होने वाला है और शासन द्वारा आज तक किसी भी प्रकार से गम्भीर समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया है। महासंघ के अध्यक्ष, सतीश कुमार पाण्डेय एवं महामंत्री, सुशील कुमार ’’बच्चा’’ ने शासन,प्रशासन द्वारा इस अति संवेदनशील मुद्दे पर दिखाई जा रही उदासीनता से क्षुब्द होकर सरकार को चेतानवी दी है कि अगर भुखमरी से त्रस्त होकर किसी कर्मचारी को आत्मदाह जैसा निर्णय करना पड़ा है तो निश्चित रूप से यह सरकार के लिये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है और अगर किसी कर्मचारी ने इस कार्य को अंजाम दिया तो पूरे प्रदेश में एक ऐसा वातावरण बनेगा जिसे सम्भालना सरकार के लिये बहुत कठिन होगा।


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