चुनाव आयोग ने आम बजट टालने की मांग पर सरकार से मांगा जवाब
पांच राज्यों में चुनाव की तारीखों का ऐलान होने के साथ ही आम बजट को लेकर विपक्षी पार्टियों में हलचल तेज हो गई है।


नई दिल्ली : पांच राज्यों में चुनाव की तारीखों का ऐलान होने के साथ ही आम बजट को लेकर विपक्षी पार्टियों में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष लगातार मांग कर रहा है कि आम बजट चुनाव के बाद पेश किया जाए। विपक्ष की इस मांग पर चुनाव आयोग ने संज्ञान लेते हुए कैबिनेट सेक्रटरी से जवाब मांगा है। चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार यह एक सामान्य प्रक्रिया है। गुरुवार को आम बजट को टलवाने के लिए कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके, जेडीयू, आरएलडी के नेता चुनाव आयोग गए थे।

विपक्षी दलों का कहना है कि आम बजट में अगर सरकार लोक लुभावन योजनाओं की घोषणा करती है तो आने वाले चुनवों में इसका प्रभाव पड़ेगा, इसलिए बजट 11 मार्च के बाद पेश होना चाहिए। 11 मार्चो को सभी 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे आने हैं। विपक्ष की इस मांग का केंद्र में एनडीए की सहयोगी शिवसेना ने भी समर्थन किया है।

चुनाव आयोग से मुलाकात के बाद प्रतिनिधिमंडल की अगुआई कर रहे कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा था, 'हमने चुनाव आयोग से मांग की है कि 1 फरवरी को बजट पेश करने पर रोक लगाई जाए। यदि सरकार 31 जनवरी से संसद सत्र बुलाती है तो हमें इस पर ऐतराज नहीं है, लेकिन बजट 8 मार्च के बाद ही पेश किया जाए ताकि सरकार को मतदाताओं को लुभाने का कोई मौका ना मिले।'

विपक्ष को जवाब देते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि अगर राजनीतिक दल दावा करते हैं कि नोटबंदी लोकप्रिय फैसला नहीं था तो उन्हें बजट से भी डर नहीं होना चाहिए। कांग्रेस, वाम, सपा और बसपा सहित विभिन्न दलों ने चुनाव आयोग को और राष्ट्रपति को पत्र लिख कर चुनाव से पहले बजट पेश किए जाने का विरोध किया है। इन दलों का कहना है कि चुनाव से ठीक पहले बजट पेश करने से भाजपा और उसके सहयोगियों को अनावश्यक तरीके से लाभ होगा, क्योंकि केंद्र सरकार मतदाताओं को लुभाने के लिए आकर्षक घोषणाएं कर सकती है।


अधिक देश की खबरें