मंदसौर में किसानों से मिलने जा रहे राहुल गाँधी को एमपी बॉर्डर के पास हिरासत में लिए गया
राहुल के साथ मौजूद कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, कमलनाथ और जेडी (यू) नेता शरद यादव को भी पुलिस ने मंदसौर जाने से रोक दिया।


मंदसौर : मंदसौर में किसानों से मिलने पर अड़े कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को गुरुवार दोपहर पुलिस ने मध्य प्रदेश सीमा के पास हिरासत में ले लिया। राहुल के साथ मौजूद कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, कमलनाथ और जेडी (यू) नेता शरद यादव को भी पुलिस ने मंदसौर जाने से रोक दिया। राहुल गांधी पुलिस और प्रशासन को चकमा देते हुए बाइक से मंदसौर के लिए निकले थे, लेकिन उन्हें नीमच में रोक दिया गया। इसके बाद पुलिस राहुल को वैन में बिठाकर वहां से ले गई। राहुल ने खुद को मंदसौर में घुसने से रोके जाने के बाद मोदी और शिवराज सरकार पर जमकर निशाना साधा। 

राहुल गांधी ने कहा कि मोदी सरकार ने अमीर लोगों का कर्ज माफ किया है, लेकिन किसानों का कर्ज माफ नहीं किया जा रहा है। मोदी किसानों को गोली दे रहे हैं। उन्होंने कहा,'आरएसएस से आपकी विचारधारा नहीं मिलती है तो आप अंदर नहीं जा सकते हैं। आप किसी से मिल नहीं सकते हैं। मैं हिंदुस्तान के नागरिकों से मिलना चाहता हूं।'

मंदसौर जाने के लिए राहुल ने यूं बदला प्लान
राहुल गांधी को मंदसौर में घुसने की इजाजत नहीं दी गई थी, बावजूद इसके वह सुबह राजस्थान के रास्ते निकल पड़े। उदयपुर के बाद नयागांव पहुंचने पर राहुल गांधी ने पुलिस को चकमा देने के लिए अपना प्लान बदल दिया। वह एक कांग्रेस विधायक की बाइक पर सवार हो गए और एक दूसरे ही रास्ते से मंदसौर के लिए निकल पड़े। हालांकि उनका यह प्लान सफल नहीं हो पाया। पुलिस ने उन्हें मध्य प्रदेश की सीमा के पास रोक लिया और फिर वह हिरासत में ले लिए गए। 

इस बीच आंदोलन के बेकाबू होने के बाद मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार अब कुछ ऐक्शन में है। राज्य सरकार ने गुरुवार को मंदसौर के डीएम स्वतंत्र कुमार सिंह और एसपी ओपी त्रिपाठी को हटा दिया। इसके साथ ही रतलाम और नीमच के डीएम भी बदले गए हैं। किसान आंदोलन के केंद्र बंने मंदसौर में ओमप्रकाश श्रीवास्तव को नया डीएम बनाया गया है। 

मंदसौर में मंगलवार को हुई पुलिस फायरिंग में पांच किसानों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद वहां किसानों का आंदोलन उग्र हो गया और प्रदर्शनकारियों ने सरकारी और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया। गरीबों और किसानों के मुद्दे को लेकर पहले ही मोदी सरकार पर निशाना साध रहे विपक्ष के हाथों में मंदसौर घटना ने एक नया हथियार थमा दिया है। राष्ट्रपति चुनाव को लेकर पहले ही एकजुट होने की कोशिश में लगे विपक्षी दल आने वाले दिनों में जल्द ही मोदी सरकार को घेर सकते हैं। 

माना जा रहा है कि विपक्ष किसान मुद्दे को लेकर कुछ उसी तरह से आक्रामक रुख दिखाने की योजना बना रहा है, जैसे लैंड बिल को लेकर तीखे तेवर सामने आए थे। दरअसल, विपक्ष को कहीं न कहीं लग रहा है कि साल 2019 से पहले होने वाले गुजरात, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश व नॉर्थ ईस्ट के कुछ राज्यों के चुनावों के मद्देनजर किसानों से जुड़ा मुद्दा ही सीधे वोटर को प्रभावित करता है। इसी के जरिए विपक्ष मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा कर सकती है।


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