बिहार कांग्रेस अध्‍यक्ष पर गिर सकती है गाज!
बिहार कांग्रेस अध्यक्ष ने पलटवार करते हुए कहा कि कुछ कांग्रेस नेता प्रदेश में पार्टी तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं.


पटना : बिहार कांग्रेस में घमासान जारी है. महागठबंधन में बिखराव के बाद अब ताजा घटनाक्रम में सूत्रों के मुताबिक पार्टी विधायकों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात कर बिहार कांग्रेस अध्‍यक्ष अशोक चौधरी पर पार्टी तोड़ने की कोशिशों का आरोप लगाया है. इस पर बिहार कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चौधरी ने पलटवार करते हुए कहा कि कुछ कांग्रेस नेता यह 'दुष्प्रचार' करके उनके खिलाफ बगावत को हवा दे रहे हैं कि वह प्रदेश में पार्टी तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं. 

AICC नेता कर रहे षड़यंत्र
अशोक चौधरी ने बताया, ''बिहार प्रदेश कांग्रेस में संकट के पीछे एआईसीसी के कुछ नेता हैं...जो मेरे खिलाफ यह दुष्प्रचार करके बगावत को हवा दे रहे हैं कि मैं नीतीश कुमार की जदयू के पक्ष में कांग्रेस को तोड़ने की कोशिश कर रहा हूं. मेरे स्थान पर अपनी पसंद के व्यक्ति को बिठाने के लिए विक्षुब्धों को 'हवा' दी जा रही हैं.'' हालांकि उन्होंने ऐसे कांग्रेसी नेताओं का नाम लिए बिना कहा कि ऐसे लोग जल्द ही बेनकाब होंगे.

महागठबंधन (जदयू—राजद—कांग्रेस) के बिखराव के बाद पार्टी के भीतर जारी संकट को लेकर पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी के बुलावे के बावजूद दिल्ली नहीं जाने के बारे में चौधरी ने कहा कि वह व्यक्तिगत कारणों से वहां नहीं जा सके हैं. उन्होंने कांग्रेस के कुछ नेताओं द्वारा उनके खिलाफ शुरू से सक्रिय होने का आरोप लगाते हुए कहा कि पूर्व में इन लोगों ने उनके खिलाफ 'एक व्यक्ति और एक पद' का मुद्दा उठाया जिस पर उन्होंने पार्टी नेतृत्व से कह दिया था कि वह प्रदेश अध्यक्ष के पद के बदले मंत्री पद छोड़ने को तैयार हैं.

चौधरी ने कहा कि अब मंत्री पद जाने के बाद केवल पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष का पद उनके पास बचा है, ऐसे में वे उनके खिलाफ जदयू के पक्ष में पार्टी के भीतर टूट की कोशिश को लेकर झूठा आरोप लगा रहे हैं. पार्टी के प्रति अपने समर्पण को दोहराते हुए चौधरी ने कहा कि छात्र काल के दौरान वे एनएसयूआई में रहे और पिछले 25 सालों से पार्टी को मजबूती प्रदान करने के लिए संघर्ष करते रहे हैं. 

विधायकों की मुलाकात
इस बीच टूट की अटकलों के बीच कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को राज्य के विधायकों से मुलाकात की और राज्य के ''राजनीतिक हालात पर चर्चा की.'' राहुल की बिहार के पार्टी विधायकों के साथ हुई इस बैठक में पार्टी महासचिव और राज्य के प्रभारी डॉ सीपी जोशी भी मौजूद थे. जोशी ने बताया, ''बिहार के पार्टी विधायकों के साथ राहुल गांधी ने मुलाकात की. कांग्रेस उपाध्यक्ष विभिन्न राज्यों के पार्टी विधायकों से समय-समय पर मिलते रहते हैं.'' कहा जा रहा है कि इस बैठक में करीब 11 विधायकों ने उनसे मुलाकात की, तो कुछ विधायक ऐसे भी थे, जिन्‍होंने राहुल से मिलने से ही मना कर दिया. सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में विधायकों ने राहुल गांधी से 2019 लोकसभा चुनाव के लिहाज से लालू प्रसाद की आरजेडी के साथ गठबंधन पर भी जल्द फ़ैसला करने को कहा. सूत्रों के मुताबिक़- कांग्रेस विधायकों ने राहुल गांधी से आरजेडी के साथ गठबंधन ख़त्म करने की अपील की. 

जदयू का नरम रुख
उल्‍लेखनीय है कि बिहार में कांग्रेस पहले जदयू एवं राजद के साथ सत्तारूढ़ महागठबंधन में शामिल थी. बाद में जदयू के भाजपा के साथ हाथ मिलाने के बाद राजद एवं कांग्रेस विपक्ष में आ गई है. कांग्रेस में बिखराव को लेकर अटकलों को बल महागठबंधन के बिखराव के बाद स्थानीय कांग्रेस नेताओं द्वारा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की आलोचना करने में नरम रवैया बरते जाने के कारण मिल रहा है. साथ ही बिहार में व्यवस्था परिवर्तन होने के बावजूद महागठबंधन सरकार में शामिल रहे राजद के मंत्रियों को बंगला खाली करने का नोटिस तो दिया गया पर कांग्रेस कोटे के मं​त्रियों में से अशोक चौधरी और अवधेश कुमार सिंह से सरकारी बंगला खाली नहीं करवाया गया .

महागठबंधन से नाता तोडने के बाद भाजपा के साथ बिहार में बनाई गई राजग की नई सरकार में नीतीश ने आठ मंत्रियों की जगह अभी खाली छोड़ रखी है. इसके बारे में अटकलें लगायी जा रही हैं कि ये जगह कांग्रेस छोड़कर आने वालों के लिए रखी गई हैं. किन्तु जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि उनकी पार्टी अन्य दलों को तोड़ने की इच्छुक नहीं है. उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस का अंदरूनी मामला है. हालांकि राहुल के साथ बैठक से ऐसा लगता है कि लालू प्रसाद के नेतृत्व को लेकर कांग्रेस में नाराजगी है. नीरज ने कहा कि कांग्रेस विधायक इस बात को भी लेकर घबराए हुए हैं कि राजद के पूर्व विधायकों की तरह लालू प्रसाद की बेनामी संपत्ति से जोडकर कहीं उन पर भी आरोप न लगाया जाये.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार गत महीने महागठबंधन के बिखरने के बाद 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में कांग्रेस के कुल 27 विधायकों में से 14 विधायकों का झुकाव नीतीश कुमार की जदयू की तरफ है जो दल बदल कानून के तहत टूट के लिए आवश्यक 18 से मात्र चार कम हैं.


अधिक देश की खबरें