अनिल कुंबले बने रहेंगे कोच : सूत्र
सूत्रों का मानना है कि बीसीसीआई में यह माना जा रहा है कि यदि कोई मतभेद हैं तो भी उनको आपस में बैठकर दूर किया जा सकता है.


लंदन : टीम इंडिया के भीतर मौजूदा कोच अनिल कुंबले और कैप्‍टन विराट कोहली के बीच रस्‍साकशी की खबरों के बीच यह खबरें आ रही हैं कि अनिल कुंबले ही कोच बने रहेंगे. सूत्रों के मुताबिक सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्‍मण के नेतृत्‍व वाली बीसीसीआई एडवाइजरी कमेटी ने अनिल कुंबले के नाम पर ही मुहर लगाने का फैसला किया है. सूत्रों के मुताबिक जल्‍द ही ये अनुशंसा बीसीसीआई को भी भेज दी जाएगी और सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित प्रशासक समिति की अंतिम मुहर लगने के बाद अनिल कुंबले का ही फिर से कोच बनने का रास्‍ता साफ हो जाएगा.

इससे पहले कार्यवाहक अध्यक्ष सीके खन्ना ने गुरुवार को सचिव अमिताभ चौधरी को पत्र लिखकर नये कोच की नियुक्ति की प्रक्रिया वेस्टइंडीज दौरे के अंत तक टालने के लिये कहा था. खन्ना ने कहा था, ‘‘मैंने सचिव को पत्र लिखकर उनसे प्रक्रिया 26 जून तक टालने के लिये कहा है जब बीसीसीआई की एसजीएम बुलाई जायेगी. भारत टूर्नामेंट खेल रहा है और ऐसे में प्रक्रिया जारी रखना सही नहीं है.’’ आईपीएल अध्यक्ष राजीव शुक्ला ने भी कहा था कि आनन फानन में नये कोच की नियुक्ति सही नहीं है. उन्होंने कहा, ‘‘कार्यवाहक अध्यक्ष ने सीनियर सदस्यों से बात की और हम सभी का मानना है कि मामला 26 जून को मुंबई में होने वाली एसजीएम में रखा जायेगा. तब तक प्रक्रिया रोक दी जाये. अधिकांश सदस्यों का यही मानना है.’’ माना जा रहा है कि इसी पृष्‍ठभूमि में यह फैसला किया गया है.

उल्‍लेखनीय है कि चैंपियंस ट्रॉफी शुरू होने से पहले बीसीसीआई ने कोच के लिए आवेदन मंगाए थे क्‍योंकि कुंबले का कार्यकाल इस ट्रॉफी के समापन के साथ ही समाप्‍त हो रहा था. इसमें वीरेंद्र सहवाग समेत छह लोगों ने आवेदन किए थे. अनिल कुंबले ने भी आवेदन किया था. हालांकि कोच-कैप्‍टन विवाद के बीच माना जा रहा था कि वह अब इस पद के लिए इच्‍छुक नहीं हैं और इस पद को छोड़ना चाहते हैं. इस विवाद के बीच बीसीसीआई प्रशासक समिति के अध्‍यक्ष विनोद राय ने तीन जून को अनिल कुंबले से बात की थी. उसके बाद हुई प्रेस कांफ्रेंस में विराट कोहली ने भी मीडिया से कहा था कि कोई विवाद नहीं है. उसके बाद से ही माना जाने लगा था कि बीसीसीआई इस विवाद को सुलझाने की कोशिशों में लगा है. सूत्रों का मानना है कि बीसीसीआई में यह माना जा रहा है कि यदि कोई मतभेद हैं तो भी उनको आपस में बैठकर दूर किया जा सकता है. इसके लिए पद छोड़ने की जरूरत नहीं है.

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