बसपा ने बैलट पेपर से चुनाव की मांग की
बसपा ने नगरीय निकाय चुनाव में पहली बार अपने चुनाव चिह्न पर प्रत्याशी उतारे थे और उसने मेयर की 16 में से दो सीटों पर अलीगढ़ और मेरठ पर कब्जा भी जमाया.


लखनऊ : बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती भविष्य में सभी चुनाव इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) के बजाय मतपत्रों (बैलट) से कराने की मांग कर रही हैं. लेकिन हाल में हुए नगरीय निकाय चुनाव के आंकड़े कुछ अलग कहानी बयां कर रहे हैं. इन चुनाव में जहां मतपत्रों से मतदान हुआ, वहां बसपा का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा है. बसपा ने नगरीय निकाय चुनाव में पहली बार अपने चुनाव चिह्न पर प्रत्याशी उतारे थे और उसने मेयर की 16 में से दो सीटों पर अलीगढ़ और मेरठ पर कब्जा भी जमाया. हालांकि 11 सीटों पर उसके प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गयी. चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक महापौर के पदों के लिये ईवीएम के जरिये मतदान कराया गया था और उसके प्रत्याशियों के जमानत जब्त होने का प्रतिशत 68.7 रहा. हालांकि नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में बसपा का प्रदर्शन और भी खराब रहा, जहां मतपत्रों से वोट डाले गये थे.

नगर पालिका परिषद अध्यक्ष की 198 सीटों में से बसपा ने 186 पर प्रत्याशी खड़े किये थे, जिनमें से 131 की जमानत जब्त हो गयी. यह 70.43 प्रतिशत है. इसी तरह नगर पंचायत अध्यक्ष की 438 सीटों में से बसपा ने 357 पर उम्मीदवार उतारे, मगर उनमें से 75 प्रतिशत यानी 268 प्रत्याशी अपनी जमानत नहीं बचा सके. इससे जाहिर होता है कि जिन स्थानों पर मतपत्रों से वोट पड़े, वहां बसपा का प्रदर्शन दरअसल खराब रहा.

समाजवादी पार्टी ने भी ईवीएम को लेकर भाजपा पर निशाना साधा था. नगरीय निकाय चुनाव के नतीजों के मुताबिक महापौर की 16 में से 10 सीटों के चुनाव में उसकी जमानत जब्त हो गयी थी. हालांकि नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के चुनाव में उसने अच्छा प्रदर्शन किया था.

सपा ने नगर पालिका अध्यक्ष की 198 में से 190 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किये थे जिनमें से 83 यानी 43.68 प्रतिशत की जमानत जब्त हुई थी. इसी तरह नगर पंचायत अध्यक्ष की 438 में से 380 सीटों पर सपा के उम्मीदवार खड़े हुए थे, उनमें से 207 यानी 54.47 प्रतिशत प्रत्याशी अपनी जमानत नहीं बचा सके थे.

गौरतलब है कि मायावती ने गत एक दिसंबर को नगरीय निकाय चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद कहा था कि अगर वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव मतपत्रों के जरिये कराये जाएं तो भाजपा जीत हासिल नहीं कर पाएगी. उनका कहना था कि अगर भाजपा को लगता है कि उसे व्यापक जनसमर्थन हासिल है तो उसे ईवीएम के बजाय मतपत्रों से मतदान कराना चाहिये. अगर ऐसा हुआ तो भाजपा की सत्ता में वापसी नहीं हो सकेगी.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मायावती के इस बयान पर पलटवार करते हुए कहा था कि बसपा अध्यक्ष अपने उम्मीदवारों की जीती सीटों पर उनसे इस्तीफा दिलवायें. उन सीटों पर ईवीएम के बजाय मतपत्रों के जरिये मतदान करा दिया जाएगा.

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