यूपी के इस गांव में दलितों के बाल नहीं काटते मुस्लिम नाई
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लखीमपुरयूपी के लखीमपुर खीरी जिले में एक गांव ऐसा है जहां आज भी दलितों के बाल नाई नहीं काटते. इन्हें बाल कटवाने 20-30 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है. जाति प्रथा और छुआछूत के चलते आज भी रामचन्दर और बाबूराम जैसे इस गाँव में रहने वाले रैदासों जाति के लोगों के बाल नहीं काटे जाते. बता दें कि खीरी जिले के मोहम्मदी तहसील का सिसौरा नासिर गांव में ज्यादातर घर मुस्लिमों के हैं. नाई भी मुस्लिम ही हैं पर दलितों के बाल नाई नहीं काटते. दलितों को बाल कटवाने हों तो उन्हें या तो मोहम्मदी या शाहजहांपुर 30 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है.

कुछ दिनों पहले एक दलित युवक रोहित पर नाइयों ने इस लिए हमला कर दिया था कि इसने बाल न काटने की शिकायत पुलिस से की थी. पीड़ित रोहित बताते है कि 5-6 की संख्या में नाईयों ने मुझ पर अस्तुरे से गले पर हमला कर दिया. इलाके के सीओ से शिकायत के बाद भी रोहित को आजतक इंसाफ नहीं मिला. फिलहाल रोहित घर पर अपना इलाज करवा रहा है. वहीं पुलिस ने नाईयों को समझाबुझा कर घर भेज दिया. पर छुआछूत की दीवार इतनी बड़ी थी कि नाई समाज उसे तोड़ न सका. जिसका सिलसिला आजादी के 70 साल बाद भी जारी है.

दलितों के बाल न काटने के मामले में गांव में रहने वाले राजेश वाल्मीकि कहते है कि आजादी के 70 साल बाद भी इस गांव में छुआछूत की जो भावना है वो चरम सीमा पर है. उन्होंने दावे के साथ कहा कि छुआछूत की वजह से वाल्मीकि समाज के दर्जनों गांव ऐसे है जहां आज भी बाल नहीं काटे जाते है. पुलिस पर शिकायत करने पर राजेश वाल्मीकि कहते है कि कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती है. उन्होंने योगी सरकार से मांग करते हुए कहा कि वाल्मीकि समाज को भी बाल और दाढ़ी बनवाने की आजादी मिलती चाहिए. क्योकि यह के मुस्लिम नाई हम दलितों के बाल-दाढ़ी नहीं बनाते.

इस मामले में मुस्लिम समाज के नाईयों का अपना तर्क था. वो कहते है कि ये प्रथा इस गांव में सदियों से चली आ रही है, लेकिन वक्त अब बदल गया है. हर सवालों का गोलमोल जवाब देते हुए नाई समाज के  बुजुर्ग कहते हैं कि अब दुनिया बदल रही है. उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में सब कुछ ठीक हो जाएगा.

दलित समाज के बाल नहीं काटने के मामले में जब एक निजी न्यूज चैनल ने लखीमपुर खीरी के डीएम शैलेन्द्र कुमार सिंह से बात की. डीएम ने कहा कि ये मामला हमारे संज्ञान में पहले आ चुका है.हमने तत्काल सीओ और एसडीएम को निर्देशित किया है कि गांव में जाकर दोनों पक्षों को एक साथ बैठाकर बातचीत करे. अगर मुस्मिम समाज के नाईयों ने दलिलों के बाल काटने से मना किया तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. शैलेन्द्र कुमार सिंह दावे के साथ कहते है कि अगर इस तरह का कोई व्यक्ति दुस्साहस कर रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी.

फिलहाल समाज में चली आ रही पुरानी रिति-रिवाज आज के हाईटेक युग में बुजुर्गों से लेकर नौजवानों के जहन में कायम है. लेकिन हमे समाज को जागरूक करना पड़ेगा कि हमारा देश आज डिजिटल क्रांति की तरफ बढ़ रहा है. हमे भी विकास की धारा के साथ चलकर पुरानी कृतियों को तोड़ना पड़ेगा.

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