इलाहाबाद यूनिवर्सिटी जा रहे अखिलेश यादव को एयरपोर्ट पर रोका
अखिलेश ने कहा, मुझे जानकारी मिली है कि रात में कुछ अधिकारियों ने मेरे घर की रैकी की थी.


लखनऊ : समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव को इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के एक कार्यक्रम में जाने के दौरान लखनऊ एयरपोर्ट पर पुलिस द्वारा रोके जाने पर मामला गरमाता दिख रहा है. अखिलेश यादव ने मीडिया को संबोधित कर बीजेपी सरकार पर हमला बोला और कहा कि उन्हें छात्रों के कार्यक्रम में न जाने का दुख है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की नियत साफ नहीं थी. 



अखिलेश यादव ने कहा, 'मुझे इस समय इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के छात्रों के बीच अपनी बात रखनी थी. इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के छात्रों और छात्रसंघ के अध्यक्ष (जो अभी हालही चुने गए हैं) के कार्यक्रम में मुझे शामिल होना था. मुझे दुख है इस बात का कि जो छात्र इतने दिनों से तैयारी कर रहे थे और उस कार्यक्रम में शामिल होकर हमें अपनी बात रखनी थी, वह नहीं हो पाया. सरकार का मन और नियत साफ नहीं रहा. यूनिवर्सिटी का कार्यक्रम मैंने बहुत महीने पहले भेज दिया था. छात्रसंघ के नेताओं ने भी प्रशासनिक अधिकारियों और वीसी से मुलाकात करने के बाद ही मुझे कार्यक्रम की तारीख दी थी.'

जनता को केवल तारीख का इंतजार
अखिलेश ने कहा, मुझे जानकारी मिली है कि रात में कुछ अधिकारियों ने मेरे घर की रैकी की थी. सुबह साढ़े छह बजे तीन अधिकारी मेरे घर के पास आकर बैठा दिए गए. मुझे लगा कि पता नहीं ये क्यों आए हैं. एयरपोर्ट परिसर में यूपी पुलिस नहीं जा सकती. लेकिन उसे बाद भी सरकार की ताकत देखिए कि यूपी के अधिकारियों ने मुझे प्लेन पर चढ़ने से रोक दिया गया. फिर सीएम योगी का भाषण देखिए कि मैं अराजकता फैलाने जा रहा था, हिंसा फैलाने जा रहा था. समन में भी उनके भाषण सुने हैं, उनकी भाषा 'ठोकने वाली' होती है. अगर मैं हिंसा फैलाने जा रहा था कि मुझ पर एक भी धारा लगी हो तो बताइए. हम आपको दिखाते हैं कि उन पर कितनी धाराएं लगी हैं. यह देश के पहले सीएम हैं, जिन्होंने खुद पर लगी धाराओं को वापस ले लिया. अभी चुनाव के दिन कम हैं, जनता केवल तारीख का इंतजार कर रही है. वह मन बना चुकी है कि उसे क्या करना है. 

छात्रों से डर रही सरकार
सपा अध्यक्ष बोले कि यह एक ऐसी सरकार है जो छात्रों से डर गई है. जो सरकार यूनिवर्सिटी के नए छात्रों से डर जाए, उसके पास कुछ बचा नहीं है. इन्होंने उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है. इसलिए ये नहीं चाहते कि कोई जाए उनके बीच में और अपनी बात रखे. उनके सपनों को मारा है, उन्हें मजबूर कर दिया है कि बेरोजगार बने रहे. कोई नौकरी का इंतजाम नहीं किया. इसलिए यह सरकार घबरा रही है. 

अधिकारी के पास नहीं थे कागज
इसके साथ ही अखिलेश ने कहा, मुझे रोकने वाले अधिकारी के पास कोई कागज भी नहीं था. मैंने अधिकारी से पूछा कि मुझे कागज दिखाइए कि क्यों रोका जा रहा है. लेकिन उनके पास कोई कागज नहीं था. उसके बाद सरकार ने कागज बनाकर मेरे पास भेजा. अब आप किसी के साथ जाना चाहते हैं तो जा नहीं सकते, किसी से कुछ बोलना चाहते हैं तो बोल नहीं सकते. लेकिन आप ऐसा व्यवहार कर रहे हैं तो आप तैयार रहें आपके साथ ही ऐसा ही होगा.

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