यूपी की जीत को दूसरे राज्यों में भी भुनाएगी भाजपा
यूपी में 403 में 325 सीट का जीतना इस बात का प्रमाणिक उदाहरण है कि उत्तर प्रदेश की जनता निर्णायक रूप से भाजपा के साथ आई है।


लखनऊ :  उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मिली धमाकेदार जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अब जीत को दूसरे राज्यों में भी मिसाल के तौर पर पेश करने की तैयारी कर रही है। पार्टी यूपी की जीत को जनादेश का एक बड़ा उदाहरण मानती है। यहां उसका न सिर्फ चुनाव के दौरान सत्तारूढ़ दल समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस गठबन्धन से मुकाबला था, बल्कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से लेकर अन्य सभी दल भी सीधे तौर पर भाजपा को ही अपना मुख्य प्रतिद्वन्दी मान रहे थे। ऐसे में पार्टी की मिली यह जीत बेहद मायने रखती है। इससे पहले लोकसभा चुनाव में भी उत्तर प्रदेश में विरोधियों को चारों खाने चित्त करने की बदौलत ही पार्टी केन्द्र की सत्ता पर काबिज हो पायी थी। अब पार्टी यूपी से सत्ता का अपना वनवास खत्म करने के साथ अन्य राज्यों में भी अपनी सरकार बनाने की तैयारी में है। 

यही वजह है कि भुवनेश्वर में आयोजित पार्टी की दो-दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में उत्तर प्रदेश की जीत चर्चा का विषय रही। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी मध्य प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक के आगामी विधानसभा चुनावों में भी उत्तर प्रदेश की तर्ज पर निर्णायक विजय हासिल करेगी। 
शाह ने कहा कि इन चुनावों में क्षेत्रीय दलों को न हरा पाने का मिथक टूटा है। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के साथ दोनों क्षेत्रीय दलों की हार हुई। यूपी में 403 में 325 सीट का जीतना इस बात का प्रमाणिक उदाहरण है कि उत्तर प्रदेश की जनता निर्णायक रूप से भाजपा के साथ आई है। यह नतीजे जातिवाद, तुष्टिकरण और परिवारवाद की राजनीति की अस्वीकृति है।

इसके साथ ही इस जीत ने यह फिर साबित किया है कि देश की आजादी के बाद से नरेन्द्र मोदी देश के सबसे लोकप्रिय नेता हैं और लोग उनमें विश्वास करते हैं। शाह ने कहा कि हम यह अपेक्षा करते थे कि हारे हुए दल ईमानदारी से अपनी हार को स्वीकार करेंगे, लेकिन अब वह हारने का बहाना ढूंढ रहे हैं और उस बहाने में ईवीएम की चर्चा हुई है। 

उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि साल 2004-09 में जब यूपीए जीती तो क्या ईवीएम ठीक थी? यूपी में सपा और बसपा जीती और दिल्ली में भाजपा हारी तो क्या ईवीएम ठीक थी? इस तरह की बातें करना हार को ईमानदारी से स्वीकार करने की बजाय चुनाव आयेग के खुले निरादर के समान है। राजनैतिक विश्लेषक हिन्दुस्थान समाचार से बातचीत में मानते हैं कि इस तरह भाजपा चुनाव वाले राज्यों में आक्रामक तरीके से न सिर्फ विरोधियों पर हमला करने की रणनीति के तहत काम करेगी। बल्कि यूपी की जीत को उदाहरण के तौर पर भी पेश करेगी। मध्य प्रदेश और गुजरात में जहां वह भगवा का परचम फिर लहराने की पुरजोर कोशिश में जुटेगी, वहां कर्नाटक में कमल खिलाने के लिए वह अभी से तैयारियों में जुट गयी है। इन सभी जगहों पर उत्तर प्रदेश का भी जिक्र होगा। 

खासतौर से पड़ोसी राज्य होने के कारण मध्य प्रदेश में यूपी में मिली फतेह का उदाहरण पेश कर भाजपा अपने पक्ष में माहौल बनाने की पूरी कोशिश करेगी। इसके साथ ही यहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कार्यभार संभालते ही जनहित के फैसले लेना, सरकार की कार्यशैली, संकल्प पत्र को पूरा करने के तहत किये जा रहे काम का भी जिक्र होगा, जिससे जनता के बीच अच्छा सन्देश जाने के साथ विरोधियों को भी धूल चटायी जा सके।

इसके साथ ही पार्टी अध्यक्ष अमित शाह यूपी की बूथ मैनेजमेन्ट रणनीति का अन्य राज्यों के चुनाव में भी अमल करेंगे। उनका मानना है बूथ में मिली जीत ही पार्टी को सत्ता तक पहुंचाती है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी पार्टी की जीत का यही मूल मंत्र रहा। यही वजह है कि शाह ने कहा कि भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन अब भी देश में बहुत सारे क्षेत्र हैं, जहां भाजपा को आगे बढ़ना है। इसलिए आलस्य नहीं करना है और वर्किंग कमेटी के सारे लोग 15 दिन का समय संगठन को देंगे, बूथों पर जाएंगे और रहेंगे। उन्होंने खुद भी बूथों पर जाने की बात कही है। 

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