नई दिल्ली : सोने की कीमतों को लेकर बाजार में हलचल है। जनवरी में ऑल टाइम हाई लगाने के बाद सोना 25% से ज्यादा लुढ़क चुका है। अब एक्सपर्ट्स 50% तक गिरावट की आशंका जता रहे हैं।
कितना गिरा सोना?
जनवरी 2026 में घरेलू बाजार में 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1.91 लाख रुपये के रिकॉर्ड पर था। फिलहाल भाव 1.41 लाख रुपये के आसपास है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में जनवरी में सोना $5,595 प्रति औंस के हाई पर था। मिडिल ईस्ट तनाव और फेड द्वारा ब्याज दर बढ़ने की आशंका से ये अब $4,000 के नीचे आ गया है।
क्या सच में 50% गिरेगा?
CoinCodex जैसे टेक-इंडिकेटर्स का अनुमान है कि साल के अंत तक सोना $2,780 प्रति औंस तक जा सकता है। यानी जनवरी के हाई से करीब 50% नीचे।
लेकिन Goldman Sachs और J.P. Morgan जैसे बड़े एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोना $3,800 से $4,000 के मजबूत सपोर्ट जोन पर टिका रहेगा और पूरी तरह क्रैश नहीं होगा।
पहले कब हुई थी इतनी बड़ी गिरावट?
एक्सपर्ट्स 2 मौकों का हवाला दे रहे हैं:
1980 की गिरावट: ईरान संकट और अफगान युद्ध के बाद सोना $850 प्रति औंस पहुंचा था। फिर फेड ने ब्याज दरें 20% तक बढ़ा दीं। 1982-85 तक सोना गिरकर $300-$350 पर आ गया। ये 60% से ज्यादा की गिरावट थी।
2011 से 2015 की मंदी: 2008 मंदी के बाद सोना $1,920 प्रति औंस गया। अर्थव्यवस्था पटरी पर आने पर निवेश शेयर बाजार में शिफ्ट हुआ। दिसंबर 2015 तक सोना $1,050 पर आ गया। ये 45% की गिरावट थी।
भारतीय बाजार पर क्या असर?
भारत में सोना कभी 50% नहीं गिरता। इसकी 2 बड़ी वजहें हैं:
डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होना
इंपोर्ट ड्यूटी और टैक्स
जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 40% गिरता है, तो भारत में ये गिरावट सिर्फ 15% से 20% ही रह जाती है।
तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि पिछले 2 साल की तेजी जरूरत से ज्यादा थी। बाजार का नियम है कि कोई कमोडिटी जब वास्तविक वैल्यू से ऊपर चली जाती है तो वो ऐतिहासिक औसत पर लौटती है।